jo maqsad giryaa-e-paiham ka hai vo ham samjhte hain | जो मक़्सद गिर्या-ए-पैहम का है वो हम समझते हैं

  - Ali Jawwad Zaidi
जोमक़्सदगिर्या-ए-पैहमकाहैवोहमसमझतेहैं
मगरजिनकोसमझनाचाहिएथाकमसमझतेहैं
ज़रामेरेजुनूँकीकाविश-ए-तामीरतोदेखें
जोबज़्म-ए-ज़िंदगीकोदरहमबरहमसमझतेहैं
उनआँखोंमेंनहींनश्तरख़ुदअपनेदिलमेंपिन्हाँहै
अबइतनीबाततोकुछहमभीहमदमसमझतेहैं
येउनकीमेहरबानीहैयेउनकीइज़्ज़त-अफ़ज़ाई
किमेरेज़ख़्मकोवोलाइक़-ए-मरहमसमझतेहैं
हमअहल-ए-दिलनेमेयार-ए-मोहब्बतभीबदलडाले
जोग़महरफ़र्दकाग़महैउसीकोग़मसमझतेहैं
झिजकतेसेक़दमबहकीसीनज़रेंरुकतीसीबातें
येअंदाज़-ए-तजाहुलवोहैजिसकोहमसमझतेहैं
सुलूक-ए-दोस्तभीहैइकइशारातेज़-गामीका
हमअहल-ए-कारवाँआँचलकोभीपरचमसमझतेहैं
हटोअहल-ए-ख़िरदअहल-ए-जुनूँकोजानेदोआगे
वहीकुछराह-ए-हस्तीकेयेपेचख़मसमझतेहैं
पलकसेइसतरहटपकाकिगोयाइककलीचटकी
हमअहल-ए-दर्दअश्क-ए-ग़मकोभीशबनमसमझतेहैं
ख़ुलूस-ए-ज़ाहिरीरोज़ानाइकमहफ़िलसजाताहै
समझतेवोभीहैंलेकिनअभीकमकमसमझतेहैं
  - Ali Jawwad Zaidi
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