dabii awaaz men karti thii kal shikwe zameen mujh se | दबी आवाज़ में करती थी कल शिकवे ज़मीं मुझ से

  - Ali Jawwad Zaidi
दबीआवाज़मेंकरतीथीकलशिकवेज़मींमुझसे
किज़ुल्मजौरकायेबोझउठसकतानहींमुझसे
अगरयेकशमकशबाक़ीरहीजहलतमद्दुनकी
ज़मानाछीनलेगादौलत-ए-इल्म-ओ-यक़ींमुझसे
तुम्हींसेक्याछुपानाहैतुम्हारीहीतोबातेंहैं
जोकहतीहैतमन्नाकीनिगाह-ए-वापसींमुझसे
निगाहेंचारहोतेहीभलाक्याहश्रउठजाता
यक़ीननइससेपहलेभीमिलेहैंवोकहींमुझसे
दिखादीमैंनेवोमंज़िलजोइनदोनोंकेआगेहै
परेशाँहैंकिआख़िरअबकहेंक्याकुफ़्रदींमुझसे
येमानाज़र्रा-ए-आवारा-ए-दश्त-ए-वफ़ाहूँमैं
निभानाहीपड़ेगातुझकोदुनिया-ए-हसींमुझसे
सर-ए-मंज़िलपहुँचकरआजयेमहसूसहोताहै
किलाखोंलग़्ज़िशेंहरगामपरहोतीरहींमुझसे
उधरसारीतमन्नाओंकामरकज़आस्ताँउनका
इधरबरहमतमन्नापरमिरीसरकशजबींमुझसे
  - Ali Jawwad Zaidi
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