qaza ke saath chale zindagi ke badle men | क़ज़ा के साथ चले ज़िंदगी के बदले में

  - Ali Abbas Ummeed
क़ज़ाकेसाथचलेज़िंदगीकेबदलेमें
मिलीछाँवभीअहल-ए-अमलकोरस्तेमें
जवाब-ए-शहर-ए-ख़मोशाँहरएकबस्तीहै
गुलाबखिलतेनहींअबकिसीदरीचेमें
ग़म-ए-हयातकीपैग़म्बरानाउल्फ़तको
जानेकबसेबसाएहुएहैंसीनेमें
पहुँचचुकेहैंयक़ींकीहुदूदमेंफिरभी
लरज़रहेहैंक़दमसाथसाथचलनेमें
शुऊ'र-ए-ज़ीस्तकीअल्हड़किरननज़रआई
हयात-ए-नौकेसिमटतेहुएधुँदलकेमें
तुम्हारेक़ुर्बकीवोसाअ'त-ए-हसींअबभी
रवाँहैसाथमिरेयादकेसफ़ीनेमें
हरएकसाँससू-ए-कहकशाँबढ़ीलेकिन
क़दमभटकतेरहेउम्रभरअँधेरेमें
निकलकेमहबस-ए-शब-रंगसेजुनूँवाले
असीरहोतेरहेअस्र-ए-नौकेधोकेमें
करेजोअज़्म-ए-सफ़रउसकोयेख़बरकरदो
किइकपड़ावहैंहमइसतवीलमेलेमें
बहाजोसुब्ह-ए-बहाराँकीजुस्तुजूमें'उमीद'
उसीलहूकाहैपरतवहरइकशगूफ़ेमें
  - Ali Abbas Ummeed
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy