fasl-e-gul men bhi vahii daur-e-khizaan hai ab ke | फ़स्ल-ए-गुल में भी वही दौर-ए-ख़िज़ाँ है अब के

  - Ali Abbas Ummeed
फ़स्ल-ए-गुलमेंभीवहीदौर-ए-ख़िज़ाँहैअबके
कैसाग़मवक़्तकेचेहरेसेअयाँहैअबके
मिशअलेंहैंधुआँहैसदा-ए-नाक़ूस
क्याख़बरक़ाफ़िला-ए-दर्दकहाँहैअबके
ज़िंदगीवक़्तकेदरतकजिसेलेआईथी
धुँदलाधुँदलाइसीइंसाँकानिशाँहैअबके
चारा-गररहमकरइसकीज़रूरतक्याहै
मेराहरज़ख़्ममिरेदिलकीज़बाँहैअबके
लाला-ज़ारोंसेतोगुल-रंगलिपटआतीथी
दिलकेवीरानेमेंहरसम्तधुआँहैअबके
मुझपेवोसानेहागुज़राहैअसीरान-ए-क़फ़स
अपनेसाएसेभीवहशतकागुमाँहैअबके
सर-ब-ज़ानूथींतमन्नाएँजानेकबसे
चश्म-ए-'उम्मीद'भीख़ूँ-नाबा-फ़शाँहैअबके
  - Ali Abbas Ummeed
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