raat tehriroon ki ab yaksar khayaali ho gaii | रात तहरीरों की अब यकसर ख़याली हो गई

  - Ali Abbas Ummeed
राततहरीरोंकीअबयकसरख़यालीहोगई
लफ़्ज़जबजागेइबारतभीनिरालीहोगई
अनगिनतचेहरेथेशहर-ए-दिलमेंलेकिनक्याकहूँ
वक़्तकासायापड़ाबस्तीयेख़ालीहोगई
जिनकाइकइकलफ़्ज़थामुज़्दानएमौसमकेनाम
हैफ़उनसफ़्हातकीसूरतभीकालीहोगई
दिलकेमहबससेचलेथेक़ाफ़िलेयादोंकेपर
इककिरनपलकोंकीसूलीपरसवालीहोगई
हम-सफ़रशाइस्तगीथीरहगुज़ार-ए-ज़ीस्तमें
फिरभीजिससेबातकीहरबातगालीहोगई
हादसोंकीधुँदसेफ़नकारनेजिसकोगढ़ा
शुक्रहैउसबुतकीपेशानीउजालीहोगई
कैसेइसमौसमकोदौर-ए-गुलकहूँ'उमीद'मैं
रंगसेमहरूमजबइकएकडालीहोगई
  - Ali Abbas Ummeed
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