taveel soch hai aur mukhtasar lahu meraa | तवील सोच है और मुख़्तसर लहू मेरा

  - Ali Abbas Ummeed
तवीलसोचहैऔरमुख़्तसरलहूमेरा
गराँसफ़रमेंहैज़ाद-ए-सफ़रलहूमेरा
वोरौनक़ेंभीगईंउसकेख़ुश्कहोतेही
सजातारहताथादीवार-ओ-दरलहूमेरा
हरएकलम्हामुझेज़िंदगीनेक़त्लकिया
तमामउम्ररहामेरेसरलहूमेरा
दयार-ए-ग़ैरकोमहकागयाहिनाबनकर
येवाक़िआ'हैरहाबे-हुनरलहूमेरा
वोरूहथीजिसेअहद-ए-वफ़ाकापासथा
कभीछोड़सकाअपनाघरलहूमेरा
उजालदेंगेअँधेरोंकीयेजबींइकदिन
बिखेरताहैकुछऐसेशररलहूमेरा
रवाँहैक़ाफ़िला-ए-फ़िक्रसू-ए-दश्त-ए-जुनूँ
दिखारहाहैउसेरहगुज़रलहूमेरा
रवानीलिखतीरहीजिनकानामआठपहर
वहींबहाएागयाख़ाकपरलहूमेरा
जानेकौनसीरुतगई'उमीद'अबके
छुपापाईमिरीचश्म-ए-तरलहूमेरा
  - Ali Abbas Ummeed
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy