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Asrar Ul Haq Majaz
phir kisi ke saamne chashm-e-tamanna jhuk gaii
phir kisi ke saamne chashm-e-tamanna jhuk gaii | फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई
- Asrar Ul Haq Majaz
फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
- Asrar Ul Haq Majaz
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मुझको
ये
नज़र
आया
के
वो
एक
बला
है
कुछ
ख़्वाब
है
कुछ
अस्ल
है
कुछ
तर्ज
-ए-
अदा
है
वो
ग़ैर
की
आग़ोश
में
रहने
लगा
शादाँ
उसको
नहीं
मालूम
के
दिल
मेरा
जला
है
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Navneet krishna
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हम
तो
तमाम
उम्र
तिरी
ही
अदा
रहे
ये
क्या
हुआ
कि
फिर
भी
हमीं
बे-वफ़ा
रहे
Jameel Malik
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तुम्हारी
इक
झलक
से
रंग
उल्फत
के
उड़ाए
हैं
नज़ारों
की
नज़ाकत
को
ज़रा
देखो
मेरी
जानाँ
Aniket sagar
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पाने
को
तुझको
मैंने
तहज्जुद
भी
की
अदा
तू
मिल
गई
तो
फ़र्ज़
भी
बैठा
हूँ
छोड़
कर
Wajid Husain Sahil
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तू
इस
तरह
से
मिला
फिर
मलाल
भी
न
रहा
तेरे
ख़याल
में
अपना
ख़याल
भी
न
रहा
कुछ
इस
अदास
झुकी
थी
हया
से
आँख
तेरी
हमारी
आँख
में
कोई
सवाल
भी
न
रहा
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Subhan Asad
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वफ़ा
का
ज़ोर
अगर
बाज़ुओं
में
आ
जाए
चराग़
उड़ता
हुआ
जुगनुओं
में
आ
जाए
खिराजे
इश्क़,
कहीं
जा
के
तब
अदा
होगा
हमारा
ख़ून
अगर
आँसुओं
में
आ
जाए
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Hashim Raza Jalalpuri
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मेहंदी
लगाए
बैठे
हैं
कुछ
इस
अदास
वो
मुट्ठी
में
उन
की
दे
दे
कोई
दिल
निकाल
के
Riyaz Khairabadi
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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अदा
हुआ
न
क़र्ज़
और
वजूद
ख़त्म
हो
गया
मैं
ज़िंदगी
का
देते
देते
सूद
ख़त्म
हो
गया
Faryad Aazar
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शहर-ए-जाँ
में
वबाओं
का
इक
दौर
था
मैं
अदा-ए-तनफ़्फ़ुस
में
कमज़ोर
था
Pallav Mishra
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सच
तो
ये
है
'मजाज़'
की
दुनिया
हुस्न
और
इश्क़
के
सिवा
क्या
है
Asrar Ul Haq Majaz
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छुप
गए
वो
साज़-ए-हस्ती
छेड़
कर
अब
तो
बस
आवाज़
ही
आवाज़
है
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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तुमने
तो
हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना
सुना
दिया
किस
दिल
से
आह
तर्क-ए-तमन्ना
करे
कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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सदा
दी
तू
ने
क्या
जाने
कहाँ
से
मगर
मैं
जानिब-ए-दिल
देखता
हूँ
Asrar Ul Haq Majaz
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