zikr meraa kahaan nahin hota | ज़िक्र मेरा कहाँ नहीं होता

  - Al-Haaj Al-Hafiz
ज़िक्रमेराकहाँनहींहोता
वोजहाँहैंवहाँनहींहोता
दिलकेशो'लेतोबुझगएदिलमें
शहर-ए-ग़ममेंधुआँनहींहोता
हर्फ़इकराज़-ए-ग़महैछोटासा
वोभीदिलमेंनिहाँनहींहोता
मीमकेसरपेऐनइकनुक़्ता
येभीनुक्ताबयाँनहींहोता
आजमहफ़िलमेंचुपवोबैठेहैं
वर्नाक्याक्याबयाँनहींहोता
दोस्तीहोगईहवादिससे
जबकोईमेहरबाँनहींहोता
दश्तअपनेलिएनशेमनहै
रासजबगुल्सिताँनहींहोता
दिनमेंआएँवोकैसेमेरेघर
राहमेंकहकशाँनहींहोता
राह-ए-उल्फ़तसेबाज़'दीवान'
इसमेंमंज़िल-निशाँनहींहोता
  - Al-Haaj Al-Hafiz
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