chaah ke uljhe hue rishte ko suljhaane chale | चाह के उलझे हुए रिश्ते को सुलझाने चले

  - Al-Haaj Al-Hafiz
चाहकेउलझेहुएरिश्तेकोसुलझानेचले
उलझनेंहदसेबढ़ींतोदिलकोबहकानेचले
पीगयातिश्ना-दहानीमेंख़ुदाजानेमैंक्या
क्यूँरसीलीआँखसेवोआगभड़कानेचले
आइनाजौहरसख़ालीहोतोआईनानहीं
इसढलेचेहरेपेक्यातुमहुस्नचमकानेचले
सरगुज़िश्तअपनेफ़सानेकीकहूँक्यानदीम
मुंसिफ़ीफिरउठगईजबख़ुदवोसमझानेचले
मो'जिज़ाइसमाजरा-ए-दिलकाअबतोमानलो
सबहुएमुश्ताक़जबहमकहकेअफ़्सानेचले
ग़महोयाराहतकिसीसेदिलबहलताहीनहीं
जबकुछभीबनपड़ीतोख़ुदकोफुसलानेचले
राहमेंकाँटेबिछाएथेजिन्होंनेआजक्यूँ
बाग़मेंदेखातोहँसकरफूलबरसानेचले
राज़-ए-दिलकुछपागए'दीवान'साहिबवर्नातो
किसख़ुशीमेंवोहमारेरंज-ओ-ग़मखानेचले
  - Al-Haaj Al-Hafiz
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