jis ghadi aql ne kuchh hosh men laana chaaha | जिस घड़ी अक़्ल ने कुछ होश में लाना चाहा

  - Al-Haaj Al-Hafiz
जिसघड़ीअक़्लनेकुछहोशमेंलानाचाहा
दिलनेदीवानामुझेऔरबनानाचाहा
दिलसेमजबूरहुएगरचेभुलानाचाहा
राज़-ए-उल्फ़तछुपालाखछुपानाचाहा
ज़हरसीचीज़भीढूँढेसेनहींहैमिलती
मैंनेघबराकेकभीज़हरजोखनाचाहा
अबतोजीनाहैबहर-हालमुझेहीन-ए-हयात
ज़ालिमइसमौतनेक्याक्याबहानाचाहा
नीचीनज़रोंकेसलामआएमुसलसलउसदम
उठकेमहफ़िलसेकभीमैंनेजोजानाचाहा
बख़्शीफ़ितरतमेंलचककितनीख़ुदानेदेखो
सर-बुलंदऔरहुआजिसनेगिरानाचाहा
दर्दअंदोहअलमऔरजमेंबैठेरहे
शाम-ए-फ़ुर्क़तमेंउन्हेंजितनाभगानाचाहा
उसकीमिट्टीहुईबर्बादगयाजानसेवो
जिसनेकूचेमेंतिरेकेठिकानाचाहा
कौनकहताहैकितदबीरसेतक़दीरबने
बनीहमनेउसेलाखबनानाचाहा
एकहमहीतोनहींअहल-ए-हुनरथेफिरक्यूँ
अहल-ए-महफ़िलनेमुझेसद्रबनानाचाहा
यूँँभीफ़नकारोंमें'दीवान'कीइज़्ज़तहैमगर
शा'इरीनेउसेकुछऔरबढ़ानाचाहा
  - Al-Haaj Al-Hafiz
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