jis raah se bhi guzar ga.e ham | जिस राह से भी गुज़र गए हम

  - Ahmad Rahi
जिसराहसेभीगुज़रगएहम
हरदिलकोगुदाज़करगएहम
जल्वेथेकिसीकेकार-फ़रमा
हरनक़्शमेंरंगभरगएहम
क्याजानिएक्याथाउसनज़रमें
उलझेतोसँवरसँवरगएहम
हमभाँपगएथेरंग-ए-महफ़िल
कहनेकोतोबे-ख़बरगएहम
हरदिलथाउदासियोंकाम'अबद
हरगामठहरठहरगएहम
बे-मेहरी-ए-दोस्ततल्ख़ी-ए-ज़ीस्त
किसकिससेनिबाहकरगएहम
उम्मीद-ए-वफ़ापेजीनेवालो
उम्मीद-ए-वफ़ामेंमरगएहम
  - Ahmad Rahi
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