koi hasrat bhi nahin koi tamannaa bhi nahin | कोई हसरत भी नहीं कोई तमन्ना भी नहीं

  - Ahmad Rahi
कोईहसरतभीनहींकोईतमन्नाभीनहीं
दिलवोआँसूजोकिसीआँखसेछलकाभीनहीं
रूठकरबैठगईहिम्मत-ए-दुश्वार-पसंद
राहमेंअबकोईजलताहुआसहराभीनहीं
आगेकुछलोगहमेंदेखकेहँसदेतेथे
अबयेआलमहैकोईदेखनेवालाभीनहीं
दर्दवोआगकिबुझतीनहींजलतीभीनहीं
यादवोज़ख़्मकिभरतानहींरिसताभीनहीं
बादबाँखोलकेबैठेहैंसफ़ीनोंवाले
पारउतरनेकेलिएहल्कासाझोंकाभीनहीं
  - Ahmad Rahi
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