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Mehshar Afridi
jagah ki kaid nahin thii koi kahii baithe
jagah ki kaid nahin thii koi kahii baithe | जगह की क़ैद नहीं थी कोई कहीं बैठे
- Mehshar Afridi
जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
- Mehshar Afridi
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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आँख
वो
इक
शहर
जिस
में
दम
घुटेगा
दिल
में
रहना
घर
में
रहने
की
तरह
है
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Neeraj Neer
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बदन
लिए
तलाशता
फिरू
हूँ
रात
दिन
उसे
सुना
है
जान
भी
मेरी
कहीं
इसी
शहर
में
है
Bhaskar Shukla
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आदत
सी
बना
ली
है
तुमने
तो
'मुनीर'
अपनी
जिस
शहर
में
भी
रहना
उकताए
हुए
रहना
Muneer Niyazi
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चैन
की
बाँसुरी
बजाइये
आप
शहर
जलता
है
और
गाइये
आप
हैं
तटस्थ
या
कि
आप
नीरो
हैं
असली
सूरत
ज़रा
दिखाइये
आप
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Gorakh Pandey
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अनोखी
वज़्अ
है
सारे
ज़माने
से
निराले
हैं
ये
'आशिक़
कौन
सी
बस्ती
के
या-रब
रहने
वाले
हैं
Allama Iqbal
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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घर
पहुँचता
है
कोई
और
हमारे
जैसा
हम
तेरे
शहरस
जाते
हुए
मर
जाते
हैं
Abbas Tabish
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इस
शहर
में
किस
से
मिलें
हम
सेे
तो
छूटीं
महफ़िलें
हर
शख़्स
तेरा
नाम
ले
हर
शख़्स
दीवाना
तिरा
Ibn E Insha
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कहाँ
तो
तय
था
चराग़ाँ
हर
एक
घर
के
लिए
कहाँ
चराग़
मुयस्सर
नहीं
शहर
के
लिए
Dushyant Kumar
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चंद
गज़
की
शहरियत
किस
काम
की
उड़ना
आता
है
तो
छत
किस
काम
की
जब
तुम्हें
चेहरे
बदलने
का
है
शौक़
फिर
तुम्हारी
असलियत
किस
काम
की
पूछने
वाला
नहीं
कोई
मिजाज़
इस
क़दर
भी
ख़ैरियत
किस
काम
की
हम
भी
कपड़ों
को
अगर
तरजीह
दें
फिर
हमारी
शख़्सियत
किस
काम
की
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Mehshar Afridi
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नेवला
और
साँप
दोनों
लड़ते
लड़ते
थक
गए
इक
तमाशा
कर
के
सब
पैसे
मदारी
ले
गया
Mehshar Afridi
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ग़म
की
दौलत
मुफ़्त
लुटा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
अश्कों
में
ये
दर्द
बहा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
तूने
तो
औक़ात
दिखा
दी
है
अपनी
मैं
अपना
मेयार
गिरा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
एक
नजूमी
सबको
ख़्वाब
दिखाता
है
मैं
भी
अपना
हाथ
दिखा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
मेरे
अंदर
इक
ख़ामोशी
चीखती
है
तो
क्या
मैं
भी
शोर
मचा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
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Mehshar Afridi
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बग़ैर
उसको
बताए
निभाना
पड़ता
है
ये
इश्क़
राज़
है
इसको
छुपाना
पड़ता
है
मैं
अपने
ज़ेहन
की
ज़िदस
बहुत
परेशाँ
हूँ
तेरे
ख़याल
की
चौखट
पे
आना
पड़ता
है
तेरे
बग़ैर
ही
अच्छे
थे
क्या
मुसीबत
है
ये
कैसा
प्यार
है
हर
दिन
जताना
पड़ता
है
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Mehshar Afridi
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सब
सेे
बेज़ार
हो
गया
हूँ
मैं
ज़ेहनी
बीमार
हो
गया
हूँ
मैं
कोई
अच्छी
ख़बर
नहीं
मुझ
में
यानी
अख़बार
हो
गया
हूँ
मैं
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Mehshar Afridi
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