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Mehshar Afridi
sabse bezaar ho gaya hooñ main
sabse bezaar ho gaya hooñ main | सब सेे बेज़ार हो गया हूँ मैं
- Mehshar Afridi
सब
सेे
बेज़ार
हो
गया
हूँ
मैं
ज़ेहनी
बीमार
हो
गया
हूँ
मैं
कोई
अच्छी
ख़बर
नहीं
मुझ
में
यानी
अख़बार
हो
गया
हूँ
मैं
- Mehshar Afridi
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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न
इब्तिदा
की
ख़बर
है
न
इंतिहा
मालूम
रहा
ये
वहम
कि
हम
हैं
सो
वो
भी
क्या
मालूम
Fani Badayuni
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हद
से
ज़्यादा
भी
प्यार
मत
करना
जी
हर
इक
पे
निसार
मत
करना
क्या
ख़बर
किस
जगह
पे
रुक
जाए
साँस
का
एतिबार
मत
करना
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Qamar Ejaz
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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किसे
ख़बर
वो
मोहब्बत
थी
या
रक़ाबत
थी
बहुत
से
लोग
तुझे
देख
कर
हमारे
हुए
Ahmad Faraz
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तुझ
को
मेरी
न
मुझे
तेरी
ख़बर
जाएगी
ईद
अब
के
भी
दबे
पाँव
गुज़र
जाएगी
Zafar Iqbal
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कोई
दवा
न
दे
सके
मशवरा-ए-दुआ
दिया
चारागरों
ने
और
भी
दर्द
दिल
का
बढ़ा
दिया
Hafeez Jalandhari
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मुझे
तो
इस
ख़बर
ने
खो
दिया
है
सुना
है
मैं
कहीं
पाया
गया
हूँ
Hafeez Jalandhari
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साक़ी
कुछ
आज
तुझ
को
ख़बर
है
बसंत
की
हर
सू
बहार
पेश-ए-नज़र
है
बसंत
की
Ufuq Lakhnavi
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न
हुआ
नसीब
क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार
भी
अब
नहीं
तिरा
इंतिज़ार
बहुत
किया
तिरा
इंतिज़ार
भी
अब
नहीं
तुझे
क्या
ख़बर
मह-ओ-साल
ने
हमें
कैसे
ज़ख़्म
दिए
यहाँ
तिरी
यादगार
थी
इक
ख़लिश
तिरी
यादगार
भी
अब
नहीं
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Jaun Elia
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बग़ैर
उसको
बताए
निभाना
पड़ता
है
ये
इश्क़
राज़
है
इसको
छुपाना
पड़ता
है
मैं
अपने
ज़ेहन
की
ज़िदस
बहुत
परेशाँ
हूँ
तेरे
ख़याल
की
चौखट
पे
आना
पड़ता
है
तेरे
बग़ैर
ही
अच्छे
थे
क्या
मुसीबत
है
ये
कैसा
प्यार
है
हर
दिन
जताना
पड़ता
है
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Mehshar Afridi
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हर
अँधेरा
रौशनी
में
लग
गया
जिसको
देखो
शा'इरी
में
लग
गया
हमको
मर
जाने
की
फ़ुर्सत
कब
मिली
वक़्त
सारा
ज़िन्दगी
में
लग
गया
अपना
मैख़ाना
बना
सकते
थे
हम
इतना
पैसा
मैकशी
में
लग
गया
ख़ुद
से
इतनी
दूर
जा
निकले
थे
हम
इक
ज़माना
वापसी
में
लग
गया
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Mehshar Afridi
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दबी
कुचली
हुई
सब
ख़्वाहिशों
के
सर
निकल
आए
ज़रा
पैसा
हुआ
तो
च्यूँँटियों
के
पर
निकल
आए
अभी
उड़ते
नहीं
तो
फ़ाख़्ता
के
साथ
हैं
बच्चे
अकेला
छोड़
देंगे
माँ
को
जिस
दिन
पर
निकल
आए
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Mehshar Afridi
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इतना
मजबूर
न
कर
बात
बनाने
लग
जाए
हम
तेरे
सर
की
क़सम
झूठ
ही
खाने
लग
जाए
इतने
सन्नाटे
पिए
मेरी
समा'अत
ने
कि
अब
सिर्फ़
आवाज़
पे
चाहूँ
तो
निशाने
लग
जाए
मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
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Mehshar Afridi
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ऐसे
हालात
से
मजबूर
बशर
देखे
हैं
अस्ल
क्या
सूद
में
बिकते
हुए
घर
देखे
हैं
हमने
देखा
है
वज़ादार
घरानों
का
जवाल
हमने
सड़कों
पे
कई
शाह
ज़फ़र
देखे
है
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Mehshar Afridi
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