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Mehshar Afridi
aise haalaat se majboor bashar dekhe hain
aise haalaat se majboor bashar dekhe hain | ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं
- Mehshar Afridi
ऐसे
हालात
से
मजबूर
बशर
देखे
हैं
अस्ल
क्या
सूद
में
बिकते
हुए
घर
देखे
हैं
हमने
देखा
है
वज़ादार
घरानों
का
जवाल
हमने
सड़कों
पे
कई
शाह
ज़फ़र
देखे
है
- Mehshar Afridi
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हमारे
घर
के
रिश्तों
में
अभी
बारीकियाँ
कम
हैं
भतीजा
मार
खाता
है
तो
चाचा
बोल
देते
हैं
Nirbhay Nishchhal
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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इसी
उम्मीद
से
मैं
देखता
हूँ
रास्ता
उसका
वो
आएगा
ज़मी
बंजर
में
इक
दिन
घर
उगाने
को
Kushal "PARINDA"
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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मैं
ये
भी
चाहती
हूँ
तिरा
घर
बसा
रहे
और
ये
भी
चाहती
हूँ
कि
तू
अपने
घर
न
जाए
Rehana Roohi
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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इतना
मजबूर
न
कर
बात
बनाने
लग
जाए
हम
तेरे
सर
की
क़सम
झूठ
ही
खाने
लग
जाए
इतने
सन्नाटे
पिए
मेरी
समा'अत
ने
कि
अब
सिर्फ़
आवाज़
पे
चाहूँ
तो
निशाने
लग
जाए
मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
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Mehshar Afridi
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उसी
को
हम
सेफ़र
करना
पड़ेगा
नहीं
तो
दूर
तक
ख़ाली
सड़क
है
Mehshar Afridi
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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इश्क़
में
दान
करना
पड़ता
है
जाँ
को
हलकान
करना
पड़ता
है
तजरबा
मुफ़्त
में
नहीं
मिलता
पहले
नुक़सान
करना
पड़ता
है
उसकी
बे-लफ़्ज़
गुफ़्तुगू
के
लिए
आँख
को
कान
करना
पड़ता
है
फिर
उदासी
के
भी
तक़ाज़े
हैं
घर
को
वीरान
करना
पड़ता
है
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Mehshar Afridi
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तुमको
हिचकी
लेने
से
भी
दिक़्क़त
थी
मैंने
तुमको
याद
ही
करना
छोड़
दिया
Mehshar Afridi
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