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Mehshar Afridi
gam ki daulat muft luta doon bilkul nahin
gam ki daulat muft luta doon bilkul nahin | ग़म की दौलत मुफ़्त लुटा दूँ बिल्कुल नहीं
- Mehshar Afridi
ग़म
की
दौलत
मुफ़्त
लुटा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
अश्कों
में
ये
दर्द
बहा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
तूने
तो
औक़ात
दिखा
दी
है
अपनी
मैं
अपना
मेयार
गिरा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
एक
नजूमी
सबको
ख़्वाब
दिखाता
है
मैं
भी
अपना
हाथ
दिखा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
मेरे
अंदर
इक
ख़ामोशी
चीखती
है
तो
क्या
मैं
भी
शोर
मचा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
- Mehshar Afridi
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उसे
तो
दौलत-ए-दुनिया
भी
कम
भी
पाने
को
मिरी
तो
ज़ात
का
मीज़ान
भी
ज़ियादा
नहीं
Vipul Kumar
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'हसरत'
की
भी
क़ुबूल
हो
मथुरा
में
हाज़िरी
सुनते
हैं
आशिक़ों
पे
तुम्हारा
करम
है
आज
Hasrat Mohani
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'अमीर'
अब
हिचकियाँ
आने
लगी
हैं
कहीं
मैं
याद
फ़रमाया
गया
हूँ
Ameer Minai
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क़त्ल
से
पहले
वो
हर
शख़्स
के
दिल
की
हसरत
पूछ
लेता
था
मगर
पूरी
नहीं
करता
था
Vishnu virat
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वो
जिसपर
उसकी
रहमत
हो
वो
दौलत
मांगता
है
क्या
मोहब्बत
करने
वाला
दिल
मोहब्बत
मांगते
है
क्या
तुम्हारा
दिल
कहे
जब
भी
उजाला
बन
के
आ
जाना
कभी
उगता
हुआ
सूरज
इज़ाज़त
मांगता
है
क्या
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Ankita Singh
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दिल-लगी
में
हसरत-ए-दिल
कुछ
निकल
जाती
तो
है
बोसे
ले
लेते
हैं
हम
दो-चार
हँसते
बोलते
Munshi Amirullah Tasleem
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दौलत
शोहरत
जैसी
छोटी
चीज़ों
का
ख़ुद्दारी
के
आगे
कोई
मोल
नहीं
Poonam Yadav
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हमें
दीदार
से
मरहूम
रखकर
है
नज़र
दिल
पर
पराया
माल
ताको
और
दौलत
अपनी
रहने
दो
Dagh Dehlvi
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गाहे
गाहे
की
मुलाक़ात
ही
अच्छी
है
'अमीर'
क़द्र
खो
देता
है
हर
रोज़
का
आना
जाना
Ameer Minai
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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नेवला
और
साँप
दोनों
लड़ते
लड़ते
थक
गए
इक
तमाशा
कर
के
सब
पैसे
मदारी
ले
गया
Mehshar Afridi
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तेरी
ख़ता
नहीं
जो
तू
ग़ुस्से
में
आ
गया
पैसे
का
ज़ो'म
था
तेरे
लहजे
में
आ
गया
सिक्का
उछालकर
के
तेरे
पास
क्या
बचा
तेरा
ग़ुरूर
तो
मेरे
काँसे
में
आ
गया
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Mehshar Afridi
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चंद
गज़
की
शहरियत
किस
काम
की
उड़ना
आता
है
तो
छत
किस
काम
की
जब
तुम्हें
चेहरे
बदलने
का
है
शौक़
फिर
तुम्हारी
असलियत
किस
काम
की
पूछने
वाला
नहीं
कोई
मिजाज़
इस
क़दर
भी
ख़ैरियत
किस
काम
की
हम
भी
कपड़ों
को
अगर
तरजीह
दें
फिर
हमारी
शख़्सियत
किस
काम
की
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Mehshar Afridi
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दबी
कुचली
हुई
सब
ख़्वाहिशों
के
सर
निकल
आए
ज़रा
पैसा
हुआ
तो
च्यूँँटियों
के
पर
निकल
आए
अभी
उड़ते
नहीं
तो
फ़ाख़्ता
के
साथ
हैं
बच्चे
अकेला
छोड़
देंगे
माँ
को
जिस
दिन
पर
निकल
आए
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Mehshar Afridi
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ऐसे
हालात
से
मजबूर
बशर
देखे
हैं
अस्ल
क्या
सूद
में
बिकते
हुए
घर
देखे
हैं
हमने
देखा
है
वज़ादार
घरानों
का
जवाल
हमने
सड़कों
पे
कई
शाह
ज़फ़र
देखे
है
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Mehshar Afridi
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