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Asrar Ul Haq Majaz
sharaab kheenchi hai sab ne gareeb ke khun se
sharaab kheenchi hai sab ne gareeb ke khun se | शराब खींची है सब ने ग़रीब के ख़ूँ से
- Asrar Ul Haq Majaz
शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
- Asrar Ul Haq Majaz
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तेरी
यादों
ने
मुझे
बदनाम
कर
रक्खा
है
कुछ
यूँँ
लोग
कहते
हैं
कि
लड़का
ये
शराबी
बन
चुका
है
Harsh saxena
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वो
गर
शराब
है
तो
समझो
कि
मैं
नशा
हूँ
कुछ
इस
तरह
से
भीतर
उस
शख़्स
के
बसा
हूँ
Harsh saxena
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जो
उन
को
लिपटा
के
गाल
चूमा
हया
से
आने
लगा
पसीना
हुई
है
बोसों
की
गर्म
भट्टी
खिंचे
न
क्यूँँकर
शराब-ए-आरिज़
Ahmad Husain Mail
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गुलाब
ख़्वाब
दवा
ज़हर
जाम
क्या
क्या
है
मैं
आ
गया
हूँ
बता
इंतिज़ाम
क्या
क्या
है
Rahat Indori
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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ऐ
शैख़
तू
शराब
के
पीछे
न
पड़
कभी
ये
ख़ुद
को
वाहियात
बनाने
की
चीज़
है
Shivsagar Sahar
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ता'रीफ़
सुन
रहा
हूँ
बहुत
तेरे
हाथ
की
साक़ी
मेरे
लिए
भी
ज़रा
सी
निकाल
दे
Shadab Javed
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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तुम्हारी
आँखों
की
तौहीन
है
ज़रा
सोचो
तुम्हारा
चाहने
वाला
शराब
पीता
है
Munawwar Rana
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पिलाओ
जाम
फिर
से
तुम
उसी
के
नाम
का
मुझको
जिसे
दिल
में
उतारे
एक
'अर्सा
हो
गया
है
अब
Abhay Mishra
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
डाइन
है
भरी
गोदों
से
बच्चे
छीन
लेती
है
ये
ग़ैरत
छीन
लेती
है
हमिय्यत
छीन
लेती
है
ये
इंसानों
से
इंसानों
की
फ़ितरत
छीन
लेती
है
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Asrar Ul Haq Majaz
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तेरे
माथे
पे
ये
आँचल
बहुत
ही
ख़ूब
है
लेकिन
तू
इस
आँचल
से
इक
परचम
बना
लेती
तो
अच्छा
था
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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सच
तो
ये
है
'मजाज़'
की
दुनिया
हुस्न
और
इश्क़
के
सिवा
क्या
है
Asrar Ul Haq Majaz
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