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Unknown
bosa jo talab main ne kiya hañs ke vo bole
bosa jo talab main ne kiya hañs ke vo bole | बोसा जो तलब मैं ने किया हँस के वो बोले
- Unknown
बोसा
जो
तलब
मैं
ने
किया
हँस
के
वो
बोले
ये
हुस्न
की
दौलत
है
लुटाई
नहीं
जाती
- Unknown
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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बादलों
में
से
छनता
हुआ
नूर
देख
ऐसी
रौशन
जबीं
है
मेरे
यार
की
Afzal Ali Afzal
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इक
बार
अपनी
माँ
को
मोहब्बत
से
देख
ले
जिसको
भी
हुस्न-ए-ताम
का
मतलब
नहीं
पता
Rohit tewatia 'Ishq'
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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नज़र
न
आए
मुझे
हुस्न
के
सिवा
कुछ
भी
वो
बे-वफ़ा
भी
अगर
है
तो
बे-वफ़ा
न
लगे
Hasan naim
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मन
के
हारे
हुए
इंसान
को
हुस्न-ए-शय
से
कोई
मतलब
नहीं
कोई
भी
सरोकार
नहीं
shaan manral
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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शौक़
के
हाथों
ऐ
दिल-ए-मुज़्तर
क्या
होना
है
क्या
होगा
इश्क़
तो
रुस्वा
हो
ही
चुका
है
हुस्न
भी
क्या
रुस्वा
होगा
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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न
हों
अश'आर
में
माअनी
न
सही
ख़ुद
कलामी
का
ज़रिया
ही
सही
तुम
न
नवाज़ो
शे'र
को,
न
सुनाएंगे
ये
मेरा
ज़ाती
नज़रिया
ही
सही
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Unknown
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एक
पत्ता
शजर-ए-उम्र
से
लो
और
गिरा
लोग
कहते
हैं
मुबारक
हो
नया
साल
तुम्हें
Unknown
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मुझको
छाँव
में
रखा
और
ख़ुद
भी
वो
जलता
रहा
मैंने
देखा
इक
फ़रिश्ता
बाप
की
परछाईं
में
Unknown
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कितने
दिलों
को
तोड़ती
है
कमबख़्त
फरवरी
यूँँ
ही
नहीं
किसी
ने
इसके
दिन
घटाए
हैं
Unknown
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बहन
का
प्यार
जुदाई
से
कम
नहीं
होता
अगर
वो
दूर
भी
जाए
तो
ग़म
नहीं
होता
Unknown
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