jinhen raas aa ga.e hain ye seher-numa andhere | जिन्हें रास आ गए हैं ये सहर-नुमा अँधेरे

  - Ahmad Rahi
जिन्हेंरासगएहैंयेसहर-नुमाअँधेरे
येतलाश-ए-सुब्ह-ए-नौमेंकभीहम-सफ़रथेमेरे
थींजोक़त्ल-गाहेंउनकीहैंवहीक़याम-गाहें
थेजोरहज़नोंकेमस्कनहैंवोरहबरोंकेडेरे
मैंजहान-ए-बे-दिलीमेंकहाँलेकेजाऊँदिलको
मिरेदिलकीघातमेंहैंयहाँचार-सूलुटेरे
शबोंकेपासबानोंमैंयेतुमसेपूछताहूँ
जिन्हेंपूजतेरहेहोवोकहाँगएसवेरे
अरेमैंतोबे-नवाहूँजोकभीबिकसकेगा
अरेतुमसुनारहोकरयहाँबनगएकसीरे
  - Ahmad Rahi
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