din guzarta hai kahaan raat kahaan hoti hai | दिन गुज़रता है कहाँ रात कहाँ होती है

  - Ahmad Rahi
दिनगुज़रताहैकहाँरातकहाँहोतीहै
दर्दकेमारोंसेअबबातकहाँहोतीहै
एकसेचेहरेतोहोतेहैंकईदुनियामें
एकसीसूरत-ए-हालातकहाँहोतीहै
ज़िंदगीकेवोकिसीमोड़पेगाहेगाहे
मिलतोजातेहैंमुलाक़ातकहाँहोतीहै
आसमानोंसेकोईबूँदनहींबरसेगी
जलतेसहराओंमेंबरसातकहाँहोतीहै
यूँँतोऔरोंकीबहुतबातेंसुनाईंउनको
अपनीजोबातहैवोबातकहाँहोतीहै
जैसीआग़ाज़-ए-मोहब्बतमेंहुआकरतीहै
वैसीफिरशिद्दत-ए-जज़्बातकहाँहोतीहै
प्यारकीआगबनादेतीहैकुंदनजिनको
उनकेज़ेहनोंमेंभलाज़ातकहाँहोतीहै
  - Ahmad Rahi
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