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Pritam sihag
anjaan safar men main tanhaa nahin hooñ yaaron
anjaan safar men main tanhaa nahin hooñ yaaron | अनजान सफ़र में मैं तन्हा नहीं हूँ यारों
- Pritam sihag
अनजान
सफ़र
में
मैं
तन्हा
नहीं
हूँ
यारों
घर
के
सभी
ज़िम्मों
को
जो
साथ
लिया
मैंने
- Pritam sihag
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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रोज़
ढक
लेती
थी
नीला
जिस्म
अपना
शुक्र
है
आ
गई
बाहर
घर
की
बातें
Parul Singh "Noor"
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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हसीन
यादों
के
चाँद
को
अलविदा'अ
कह
कर
मैं
अपने
घर
के
अँधेरे
कमरों
में
लौट
आया
Hasan Abbasi
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इसी
उम्मीद
से
मैं
देखता
हूँ
रास्ता
उसका
वो
आएगा
ज़मी
बंजर
में
इक
दिन
घर
उगाने
को
Kushal "PARINDA"
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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यूँँ
तो
लिख
लूँगा
अपने
आप
ही
मेरी
कहानी
मैं
हो
इन
में
नाम
गर
अपनों
के
भी
शामिल
तो
क्या
होता
Pritam sihag
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ये
तुम
रोज़
किस
दरिया
में
बह
रहे
हो
ये
दिल
ख़ाली
है,
तुम
कहाँ
रह
रहे
हो
ये
मैं
हूँ
कि
ग़म
में
लिखे
जा
रहा
हूँ
वो
कहते
हैं
अच्छी
ग़ज़ल
कह
रहे
हो
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Pritam sihag
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किसी
पर
आया
नहीं
ये
दिल
हमारा
फूलों
का
शौक़ीन
है
क़ातिल
हमारा
अब
तो
इस
सागर
में
डूबेगी
ये
कश्ती
यार
पीछे
रह
गया
साहिल
हमारा
वो
जुदा
होने
का
कहकर
हट
गई
थी
क्या
बताऊँ
जीना
है
मुश्किल
हमारा
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Pritam sihag
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जानते
हो
तुम
सच्चे
इश्क़
की
रवानी
क्या
मरने
भर
से
पूरी
हो
जाती
है
कहानी
क्या
मेरी
इन
सफलताओं
से
उदास
हैं
वो
सब
उनको
ये
नहीं
दिखती
काँटों
की
निशानी
क्या
क्यूँँ
उदास
रहते
हो
साफ़
साफ़
कह
दो
ये
अबकी
बार
भी
वो
बातें
नहीं
निभानी
क्या
अपने
प्यारे
से
क्यूँँ
तुम
सारे
दिन
झगड़ते
हो
आपको
ये
कश्ती
तट
पर
नहीं
लगानी
क्या
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Pritam sihag
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ये
कहानी
झूठी
है
,पर
सच्चा
मैं
किरदार
हूँ
यूँँ
ख़फ़ा
मत
हो
तू
,मैं
तेरे
बिना
बे-कार
हूँ
ए
मोहब्बत
के
समुंदर
मुझ
को
ले
डूबेगा
तू
कश्ती
भी
उसकी
हुई
,ऊपर
से
बे-पतवार
हूँ
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Pritam sihag
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