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Pritam sihag
ye kahaanii jhoothi hai par saccha main kirdaar hooñ
ye kahaanii jhoothi hai par saccha main kirdaar hooñ | ये कहानी झूठी है ,पर सच्चा मैं किरदार हूँ
- Pritam sihag
ये
कहानी
झूठी
है
,पर
सच्चा
मैं
किरदार
हूँ
यूँँ
ख़फ़ा
मत
हो
तू
,मैं
तेरे
बिना
बे-कार
हूँ
ए
मोहब्बत
के
समुंदर
मुझ
को
ले
डूबेगा
तू
कश्ती
भी
उसकी
हुई
,ऊपर
से
बे-पतवार
हूँ
- Pritam sihag
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हवा
ख़फ़ा
थी
मगर
इतनी
संग-दिल
भी
न
थी
हमीं
को
शमा
जलाने
का
हौसला
न
हुआ
Qaisar-ul-Jafri
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उदास
लोग
इसी
बात
से
हैं
ख़ुश
कि
चलो
हमारे
साथ
हुए
हादसों
की
बात
हुई
Abhishar Geeta Shukla
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जैसे
देखा
हो
आख़िरी
सपना
रात
इतनी
उदास
थीं
आँखें
Siraj Faisal Khan
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उठाओ
कैमरा
तस्वीर
खींच
लो
इन
की
उदास
लोग
कहाँ
रोज़
मुस्कराते
हैं
Malikzada Javed
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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उदासी
जैसे
कि
उसके
बदन
का
हिस्सा
है
अधूरा
लगता
है
वो
शख़्स
अगर
उदास
न
हो
Vikram Sharma
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उदास
रहने
से
ग़ज़लों
में
जान
आती
है
सो
पूरा
ध्यान
लगाकर
उदास
रहने
लगे
Nadim Nadeem
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तेरा
बुत
तो
नहीं
था
पास
मेरे,
तेरी
यादों
को
अपने
पास
रखा
गोया
हस्ते
हुए
भी
हमने
सदा,
अपने
दिल
को
बहुत
उदास
रखा
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Prince
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जैसे
उदास
करने
मुझे
आई
ईद
हो
तेरे
बगैर
कैसी
मिरी,
माई
ईद
हो
Sayeed Khan
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जो
ग़ुस्सा
आ
गया
तो
क्या
ही
कर
लेंगे
ज़ुबाँ
ये
मेरी
गाली
भी
नहीं
देती
Irshad Siddique "Shibu"
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किसी
पर
आया
नहीं
ये
दिल
हमारा
फूलों
का
शौक़ीन
है
क़ातिल
हमारा
अब
तो
इस
सागर
में
डूबेगी
ये
कश्ती
यार
पीछे
रह
गया
साहिल
हमारा
वो
जुदा
होने
का
कहकर
हट
गई
थी
क्या
बताऊँ
जीना
है
मुश्किल
हमारा
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Pritam sihag
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जानते
हो
तुम
सच्चे
इश्क़
की
रवानी
क्या
मरने
भर
से
पूरी
हो
जाती
है
कहानी
क्या
मेरी
इन
सफलताओं
से
उदास
हैं
वो
सब
उनको
ये
नहीं
दिखती
काँटों
की
निशानी
क्या
क्यूँँ
उदास
रहते
हो
साफ़
साफ़
कह
दो
ये
अबकी
बार
भी
वो
बातें
नहीं
निभानी
क्या
अपने
प्यारे
से
क्यूँँ
तुम
सारे
दिन
झगड़ते
हो
आपको
ये
कश्ती
तट
पर
नहीं
लगानी
क्या
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Pritam sihag
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यूँँ
ही
नहीं
लगाया
सिगरेट
को
लबों
से
मैं
उसकी
सारी
यादें
सुलगाना
चाहता
हूँ
Pritam sihag
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एक
और
वा'दा
उसने
किया
मोहब्बत
का
पिछले
साल
भी
ऐसे
वादे
से
वो
मुकरी
थी
Pritam sihag
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रिवीज़न
सौ
दफ़ा
कर
के
था
मैं
आया
क़िताबों
के
मैं
पर्चे
भी
बना
लाया
मैं
बैठा
इश्क़
के
इस
इम्तिहाँ
में
जब
तो
पेपर
ही
सिलेबस
से
परे
आया
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Pritam sihag
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