kabhi lehje men kuchh talkhi nahin thii | कभी लहजे में कुछ तल्ख़ी नहीं थी

  - Anant Shahrag
कभीलहजेमेंकुछतल्ख़ीनहींथी
बसइकमुझ
मेंयहीख़ूबीनहींथी
बिछड़नेकीअज़ादारीनहींथी
मुझेइसपरभीहैरानीनहींथी
मिरीकश्तीभँवरसेइश्क़करती
किसीसाहिलकीवोक़ैदीनहींथी
येदुनियाबज़्मथीबसवहशियोंकी
मुहब्बतजिस
मेंअबबाक़ीनहींथी
कमीक्याथीबताऊँचायमेंमैं
बसउसदिनचायवोजूठीनहींथी
मुझेघाइलकियाथानज़रोंनेही
कोईभीहुस्न-ए-ज़ेबाईनहींथी
महकतारीथीमुझपेउनकीऐसे
मिटानेपेभीजोमिटतीनहींथी
मुझेइंसानसेपत्थरबनाया
तुम्हारीक्याकोईग़लतीनहींथी
मुहब्बतथादिलोंकारिश्ता'शहरग'
येबिल्कुलभीअदाकारीनहींथी
  - Anant Shahrag
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