यूँँतोनिगाह-ए-शौक़मेंभगवानहैंबहुत
फिरक्यूँहमारेदुखसेवोअंजानहैंबहुत
रुख़सार,आँखें,बाल,अदाऔरभीकई
उनपेतोनज़्मकहनेकोउनवानहैंबहुत
आईवबातोआदमीयूँँरोयाचीख़कर
देखाजहाँजहाँवहींशमशानहैंबहुत
शिकवाशिकायतोंकासबबलाज़मीभीहै
हमउनसेेऔरवोहमसेपरेशानहैंबहुत
रातोंकोजागतेहुएहीभोरहोगई
चादरमेंउनकीयाद-ए-हवादानहैंबहुत
फूलोंसेरिश्ताऔरपरिंदोंसेराब्ता
ग़ज़लेंहमारीइसलिएवीरानहैंबहुत
शहरगइसीहीउम्रसेकहनेलगेग़ज़ल
सबदेखकरकेआपकोहैरानहैंबहुत