ye j | ये जितना उस से अब तक खुल गए हैं

  - Anant Shahrag
येजितनाउससेअबतकखुलगएहैं
कभीइतनाकिसीसेनईंखुलेहैं
वोहैपैवस्तमुझमेंइसतरहकुछ
ग़ज़लमेंबसउसीकेक़ाफ़िएहैं
नहींथाखोलनायेराज़हमको
मगरअबसामनेसेबोलतेहैं
नहींकरनीहैजाओबातउससे
अरेहमयारतन्हाहीभलेहैं
कहींयेआशियानेबहजाए
लिहाज़ाबारिशेंरोकेहुएहैं
भरेंगेकैसेबतलाओज़रातुम
हमारेदरमियाँजोफ़ासलेहै
किसीकोकुछकिसीकोकुछलगाहूँ
अलगशहरगकेसारेज़ाविएहैं
  - Anant Shahrag
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