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Neeraj Neer
achchhii burii har ik kamii ke saath hain
achchhii burii har ik kamii ke saath hain | अच्छी बुरी हर इक कमी के साथ हैं
- Neeraj Neer
अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
- Neeraj Neer
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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ख़ुदा
बचाए
तिरी
मस्त
मस्त
आँखों
से
फ़रिश्ता
हो
तो
बहक
जाए
आदमी
क्या
है
Khumar Barabankvi
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ठहाका
मार
कर
हथियार
हँसते
नहीं
जीतेंगे
अब
इंसान
हम
सेे
Umesh Maurya
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देख
कर
इंसान
की
बेचारगी
शाम
से
पहले
परिंदे
सो
गए
Iffat Zarrin
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आदमी
देश
छोड़े
तो
छोड़े
'अली'
दिल
में
बसता
हुआ
घर
नहीं
छोड़ता
एक
मैं
हूँ
कि
नींदें
नहीं
आ
रही
एक
तू
है
कि
बिस्तर
नहीं
छोड़ता
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Ali Zaryoun
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आने
वाले
जाने
वाले
हर
ज़माने
के
लिए
आदमी
मज़दूर
है
राहें
बनाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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नस्ल-ए-आदम
रफ़्ता
रफ़्ता
ख़ुद
को
कर
लेगी
तबाह
इतनी
सख़्ती
से
क़यामत
पेश
आएगी
न
पूछ
Abhinandan pandey
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बस
एक
मैं
था
जिस
सेे
सच
मुच
में
दिलबरी
की
वरना
हर
आदमी
से
उसने
दो
नंबरी
की
जिस
बात
में
भी
हमने
ख़ुद
को
अकेला
रक्खा
बाग़ात
में
भी
हमने
जोड़ों
की
मुख़बरी
की
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Muzdum Khan
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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यूँँ
कहें
नुमाइशों
के
दिन
क़रीब
आ
गए
महज़
फ़रवरी
हो
किस
तरह
महीना
इश्क़
का
Neeraj Neer
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ठीक
है
मैं
फेर
लेता
हूँ
नज़र
को
तुम
भी
झुमके
से
कहो
गर्दन
न
चू
में
नीरज
नीर
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Neeraj Neer
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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वहम
होता
है
कि
छूने
से
सँवर
जाएँगी
सोचता
हूँ
जो
मुक़द्दर
मिरा
ज़ुल्फ़ें
तेरी
Neeraj Neer
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अब
नमक
कैसे
नमक
होगा
मिरी
जाँ
होंठ
से
लगकर
तिरे
शक्कर
बना
है
Neeraj Neer
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