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Zafar Siddqui
aag se khelne ke chakkar men
aag se khelne ke chakkar men | आग से खेलने के चक्कर में
- Zafar Siddqui
आग
से
खेलने
के
चक्कर
में
अपना
वो
हाथ
ही
जला
बैठे
- Zafar Siddqui
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ख़बर
मिली
है
स्टेशन
पर
तुम
भी
आने
वाली
हो
रेल
को
पीछे
छोड़
दीया
है
साँसों
की
रफ़्तारों
ने
Shadab Javed
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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जब
से
वो
समुंदर
पार
गया
गोरी
ने
सँवरना
छोड़
दिया
Bekal Utsahi
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कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
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ज़िन्दगी
छीन
ले
बख़्शी
हुई
दौलत
अपनी
तूने
ख़्वाबों
के
सिवा
मुझ
को
दिया
भी
क्या
है
Akhtar Saeed Khan
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आप
कहते
थे
कि
रोने
से
न
बदलेंगे
नसीब
उम्र
भर
आप
की
इस
बात
ने
रोने
न
दिया
Sudarshan Fakir
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
भर
को
रुला
दिया
होता
Gulzar
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उसने
हम
सेे
बातें
करना
छोड़
दिया
माँ
की
जिस
सेे
बात
कराने
वाले
थे
Tanoj Dadhich
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वहाँ
शायद
कोई
बैठा
हुआ
है
अभी
खिड़की
में
इक
जलता
दिया
है
Aadil Raza Mansoori
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मैने
बचा
रखा
है
ईमान
ज़िन्दगी
में
दूँ
साथ
हक
का
है
ये
अरमान
ज़िन्दगी
में
मैं
चल
पड़ा
मिटाने
नफ़रत
जहाँ
से
सारे
ये
राह
भी
नहीं
है
आसान
ज़िन्दगी
में
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Zafar Siddqui
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नशेमन
उस
का
फिर
आबाद
होगा
परिंदा
क़ैदस
आज़ाद
होगा
करेंगे
इश्क़
हम
इक
दूसरे
से
वज़ीफ़ा
ये
तुम्हें
भी
याद
होगा
मिरी
तकलीफ़
बढ़ती
जा
रही
है
मिरा
दुश्मन
यक़ीनन
शाद
होगा
किसी
के
दिल
में
गर
नफ़रत
भरी
है
तो
वो
इंसान
भी
जल्लाद
होगा
गुनाहों
से
जो
बचता
है
यहाँ
पर
बरोज़े
हश्र
भी
वो
शाद
होगा
मेरी
ख़ुशियों
से
वो
जलने
लगा
है
ज़फर
फिर
ग़म
नया
ईजाद
होगा
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Zafar Siddqui
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भूल
जाओ
ये
हिज्र
के
ग़म
को
वस्ल
की
शाम
मुस्कुराओ
तुम
इक
ज़माने
से
यार
हूँ
प्यासा
कुछ
मेरी
प्यास
तो
बुझाओ
तुम
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Zafar Siddqui
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सब
हमीं
पर
ही
लाज़मी
है
क्या
तुम
भी
वा'दा
कभी
करो
कोई
Zafar Siddqui
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ये
तुम्हें
क्या
हुआ
है
क्या
ग़म
है
तुम
बताओ
तो
आँख
क्यूँ
नम
है
एक
ही
घूँट
में
शिफ़ा
होगी
पीके
देखो
ये
आब-ए-ज़मज़म
है
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Zafar Siddqui
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