hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Zafar Siddqui
sab humeen par hi laazmi hai kya
sab humeen par hi laazmi hai kya | सब हमीं पर ही लाज़मी है क्या
- Zafar Siddqui
सब
हमीं
पर
ही
लाज़मी
है
क्या
तुम
भी
वा'दा
कभी
करो
कोई
- Zafar Siddqui
Download Sher Image
कितने
प्यारे
हैं
ये
सुहाने
ख़त
पढ़
रहा
हूँ
तिरे
पुराने
ख़त
ख़त
के
लफ्ज़ों
में
है
तिरी
ख़ुशबू
चूमता
रहता
हूँ
सुहाने
ख़त
नींद
भी
फिर
सुहानी
आती
है
जब
भी
पढ़ता
हूँ
मैं
पुराने
ख़त
मैं
भुलाना
तो
चाहता
हूँ
तुझे
पर
नहीं
देते
हैं
भुलाने
ख़त
इश्क़
रुस्वा
न
होने
दूँगा
मैं
ये
किसी
को
नहीं
दिखाने
ख़त
याद
उसकी
ज़फर
सताती
है
देखता
जब
भी
हूँ
पुराने
ख़त
Read Full
Zafar Siddqui
Download Image
0 Likes
तुम
यक़ीं
मत
मशीन
पर
रखना
पाँव
अपने
ज़मीन
पर
रखना
वो
ज़फ़र
जाल
में
फँसाएगा
तुम
नज़र
उस
हसीन
पर
रखना
Read Full
Zafar Siddqui
Send
Download Image
0 Likes
बात
अब
तीर
की
तरह
होगी
शा'इरी
मीर
की
तरह
होगी
है
फ़साना
ज़फ़र
का
राँझा
सा
दास्ताँ
हीर
की
तरह
होगी
Read Full
Zafar Siddqui
Send
Download Image
1 Like
यूँँ
कोई
बे
वफ़ा
नहीं
होता
बे
सबब
ही
जुदा
नहीं
होता
आ
गए
लोग
कुछ
मदद
करने
हर
कोई
तो
बुरा
नहीं
होता
किस
घड़ी
किस
को
मौत
आ
जाए
ये
किसी
को
पता
नहीं
होता
जंग
दुश्मन
से
जीत
ली
मैंने
हौसला
हो
तो
क्या
नहीं
होता
ऐसे
रस्ते
पे
चल
पड़ा
हूँ
मैं
ख़त्म
ही
रास्ता
नहीं
होता
Read Full
Zafar Siddqui
Download Image
1 Like
जंग
मैदान-ए-जंग
में
होगी
क़त्ल
भी
अब
किसी
को
होना
है
Zafar Siddqui
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Dhoop Shayari
Religion Shayari
War Shayari
Falak Shayari
Sooraj Shayari