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Zafar Siddqui
baat ab teer kii tarah hogii
baat ab teer kii tarah hogii | बात अब तीर की तरह होगी
- Zafar Siddqui
बात
अब
तीर
की
तरह
होगी
शा'इरी
मीर
की
तरह
होगी
है
फ़साना
ज़फ़र
का
राँझा
सा
दास्ताँ
हीर
की
तरह
होगी
- Zafar Siddqui
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बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
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Khurram Afaq
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मैं
शाइर
उसको
चूड़ी
ही
दे
सकता
था
बस
रिश्ता
सोने
के
कंगन
देने
पर
होता
है
Neeraj Neer
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ख़्वाबों
को
आँखों
से
मिन्हा
करती
है
नींद
हमेशा
मुझ
सेे
धोखा
करती
है
उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वग़ैरा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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हर
क़दम
हर
साँस
गिरवी
ज़िंदगी
रहम-ओ-करम
इतने
एहसानों
पे
जीने
से
तो
मर
जाना
सही
Ajeetendra Aazi Tamaam
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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प्यार
का
रिश्ता
ऐसा
रिश्ता
शबनम
भी
चिंगारी
भी
यानी
उन
सेे
रोज़
ही
झगड़ा
और
उन्हीं
से
यारी
भी
Ateeq Allahabadi
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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त'अल्लुक़
जो
भी
रक्खो
सोच
लेना
कि
हम
रिश्ता
निभाना
जानते
हैं
Ambreen Haseeb Ambar
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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यार
की
यार
से
जुदाई
है
हिज्र
की
याद
से
लड़ाई
है
ग़म
से
मेरा
उदास
है
बिस्तर
याद
तेरी
'ज़फर'
जो
आई
है
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Zafar Siddqui
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मुझ
को
बख़्शी
है
तू
ने
ख़ुद्दारी
मुफ़्लिसी
दिल
से
शुक्रिया
तेरा
Zafar Siddqui
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सब
हमीं
पर
ही
लाज़मी
है
क्या
तुम
भी
वा'दा
कभी
करो
कोई
Zafar Siddqui
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तीर
का
तेरे
निशाना
आ
गया
सामने
तेरा
दिवाना
आ
गया
ये
मोहब्बत
का
असर
भी
खूब
है
नफरतों
को
सर
झुकाना
आ
गया
हो
गया
मुझको
भी
हासिल
ये
हुनर
पत्थरों
में
गुल
खिलाना
आ
गया
देख
कर
अब
मुस्कुरा
देता
है
वो
दिल
उसे
भी
अब
चुराना
आ
गया
वो
अदब
से
पेश
भी
आने
लगे
प्यार
उन
को
भी
निभाना
आ
गया
ठोकरें
खा
कर
मुझे
भी
दोस्तों
राह
पर
चलना
चलाना
आ
गया
जब
से
आदत
सोचने
की
छोड़
दी
फिर
ज़फर
को
मुस्कुराना
आ
गया
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Zafar Siddqui
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दाग़
समझे
है
ज़माना
चाँद
हूँ
माँ
के
लिए
मैं
Zafar Siddqui
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