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Zafar Siddqui
yaar ki yaar se judaai hai
yaar ki yaar se judaai hai | यार की यार से जुदाई है
- Zafar Siddqui
यार
की
यार
से
जुदाई
है
हिज्र
की
याद
से
लड़ाई
है
ग़म
से
मेरा
उदास
है
बिस्तर
याद
तेरी
'ज़फर'
जो
आई
है
- Zafar Siddqui
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कितना
आसाँ
था
तिरे
हिज्र
में
मरना
जानाँ
फिर
भी
इक
उम्र
लगी
जान
से
जाते
जाते
Ahmad Faraz
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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इक
तेरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरज़ी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारा
हिज्र
मना
लूँ
अगर
इजाज़त
हो
मैं
दिल
किसी
से
लगा
लूँ
अगर
इजाज़त
हो
Jaun Elia
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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उभर
कर
हिज्र
के
ग़म
से
चुनी
है
ज़िंदगी
हमने
वगरना
हम
जहाँ
पर
थे
वहाँ
पर
ख़ुद-कुशी
भी
थी
Naved sahil
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हर
तरफ़
ज़ुल्म
की
ही
ख़बर
है
ख़ौफ़
में
जी
रहा
हर
बशर
है
सख़्त
होना
पड़ेगा
हमें
भी
वरना
जीने
की
मुश्किल
डगर
है
हम
भी
क़ाइल
हैं
उन
की
हया
के
उन
की
रहती
जो
नीची
नज़र
है
फ़िक्र
उस
की
करूँगा
हमेशा
उन्सियत
उस
को
मुझ
सेे
अगर
है
इश्क़
कर
के
ज़रा
मुझ
सेे
देखो
जाँ
लुटा
दूँ
ये
क़ौले
ज़फर
है
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Zafar Siddqui
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हाथ
में
उसके
अँगूठी
नाक
में
थी
उस
के
नथ
रात
मुझ
को
देख
कर
वो
ख़ूब
शरमाती
रही
Zafar Siddqui
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कॉल
पर
कॉल
हमदम
करे
है
राह
दुश्वार
मौसम
करे
है
बीच
मझधार
में
फँस
गया
हूँ
आँख
ये
मसअला
नम
करे
है
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Zafar Siddqui
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तुम
यक़ीं
मत
मशीन
पर
रखना
पाँव
अपने
ज़मीन
पर
रखना
वो
ज़फ़र
जाल
में
फँसाएगा
तुम
नज़र
उस
हसीन
पर
रखना
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Zafar Siddqui
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कुछ
नहीं
तेरी
सुनने
वाले
अब
तू
लगा
ले
ज़बाँ
पे
ताले
अब
सब
के
सब
कब
तलक
यूँँ
बैठोगे
पाँव
घर
से
कोई
निकाले
अब
जितना
चाहे
तराश
डाले
तू
ख़ुद
को
तेरे
किया
हवाले
अब
ज़ुल्म
तुम
को
नज़र
नहीं
आता
साफ़
आँखों
के
कर
लो
जाले
अब
ज़ाइक़ा
ही
बिगड़
गया
मुँह
का
ऐसे
महँगे
हुए
निवाले
अब
मौत
अब
जान
ले
के
छोड़ेगी
है
कोई
जो
तुझे
बचा
ले
अब
बुज़दिली
अब
नहीं
दिखाऍंगे
हो
गए
हैं
ज़फर
जियाले
अब
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Zafar Siddqui
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