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Zafar Siddqui
haath men uske angoo
haath men uske angoo | हाथ में उसके अँगूठी नाक में थी उस के नथ
- Zafar Siddqui
हाथ
में
उसके
अँगूठी
नाक
में
थी
उस
के
नथ
रात
मुझ
को
देख
कर
वो
ख़ूब
शरमाती
रही
- Zafar Siddqui
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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मुझे
एक
लाश
कहकर
न
बहाओ
पानियों
में
मेरा
हाथ
छू
के
देखो
मेरी
नब्ज़
चल
रही
है
Azm Shakri
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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वो
राही
हूँ
पलभर
के
लिए,
जो
ज़ुल्फ़
के
साए
में
ठहरा,
अब
ले
के
चल
दूर
कहीं,
ऐ
इश्क़
मेरे
बेदाग
मुझे
।
Raja Mehdi Ali Khan
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जिसने
ज़ख़्मों
को
ही
उभारा
हो
साथ
उस
के
कहाँ
गुज़ारा
हो
चाँद
कितना
हसीन
लगता
है
साथ
में
जब
कोई
सितारा
हो
इक
इशारे
पे
जान
भी
दे
दूँ
काश
तेरा
अगर
इशारा
हो
मुझ
को
डसने
लगी
है
तन्हाई
साथ
कुछ
रोज़
अब
तुम्हारा
हो
होश
खो
बैठे
ये
ज़फर
अपना
इस
क़दर
हुस्न
का
नज़ारा
हो
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Zafar Siddqui
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उम्र
भर
की
मेरी
कमाई
हो
पास
आ
हिज्र
रिहाई
हो
तू
कोई
तो
दवा
बता
ऐसी
ज़ख़्म
की
जो
मिरे
दवाई
हो
ज़िन्दगी
भर
ही
ज़ख़्म
झेले
हैं
ज़ख़्म
से
काश
अब
जुदाई
हो
शोहरतें
क्यूँ
नहीं
मिलेंगी
मुझे
हर
तरफ़
मेरी
भी
बुराई
हो
फ़ाइलातुन
मुफ़ाइलुन
फ़ेलुन
काश
इस
बह्र
में
रुबाई
हो
एक
पल
भी
बता
मुझे
ऐसा
जब
'ज़फ़र'
ने
ख़ुशी
मनाई
हो
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Zafar Siddqui
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प्यास
बुझती
नहीं
होंठ
सूखे
पड़े
हाल
क्या
हो
गया
ग़म
के
बाज़ार
में
रात
कटती
है
बिस्तर
पे
करवट
में
अब
चैन
लूटा
है
तू
ने
सनम
प्यार
में
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Zafar Siddqui
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यार
की
यार
से
जुदाई
है
हिज्र
की
याद
से
लड़ाई
है
ग़म
से
मेरा
उदास
है
बिस्तर
याद
तेरी
'ज़फर'
जो
आई
है
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Zafar Siddqui
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हुस्न
की
मत
नुमाइश
किया
कीजिए
यूँँ
न
बे-पर्दा
छत
पर
दिखा
कीजिए
Zafar Siddqui
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