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Zafar Siddqui
shab judaai ki ab dhal rahi hai
shab judaai ki ab dhal rahi hai | शब जुदाई की अब ढल रही है
- Zafar Siddqui
शब
जुदाई
की
अब
ढल
रही
है
वस्ल
की
राह
पर
चल
रही
है
इश्क़
में
मैं
ही
पागल
नहीं
था
थोड़ा
वो
भी
तो
पागल
रही
है
रात
करवट
पे
करवट
बदल
कर
हिज्र
की
आग
में
जल
रही
है
वक़्त
फ़ाक़ों
पे
गुज़रा
है
अक्सर
यूँँ
ग़रीबी
मुसलसल
रही
है
ऐ
ज़फर
हर
किसी
की
दु'आ
से
हर
दु'आ
माँ
की
अफज़ल
रही
है
- Zafar Siddqui
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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हमें
इस
मिट्टी
से
कुछ
यूँँ
मुहब्बत
है
यहीं
पे
निकले
दम
दिल
की
ये
हसरत
है
हमें
क्यूँ
चाह
उस
दुनिया
की
हो
मौला
हमारी
तो
इसी
मिट्टी
में
जन्नत
है
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Harsh saxena
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हाए
कोई
दवा
करो
हाए
कोई
दु'आ
करो
हाए
जिगर
में
दर्द
है
हाए
जिगर
को
क्या
करूँँ
Hafeez Jalandhari
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ये
इम्तियाज़
ज़रूरी
है
अब
इबादत
में
वही
दु'आ
जो
नज़र
कर
रही
है
लब
भी
करें
Abhishek shukla
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दु'आ
में
माँग
लूँ
मैं
उसको
लेकिन
फ़क़त
पाना
मेरा
मक़सद
नहीं
है
Shadab Asghar
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कमी
कमी
सी
थी
कुछ
रंग-ओ-बू-ए-गुलशन
में
लब-ए-बहार
से
निकली
हुई
दु'आ
तुम
हो
Ali Sardar Jafri
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उस
से
मिले
ज़माना
हुआ
लेकिन
आज
भी
दिल
से
दु'आ
निकलती
है
ख़ुश
हो
जहाँ
भी
हो
Mohammad Alvi
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बाप
ज़ीना
है
जो
ले
जाता
है
ऊँचाई
तक
माँ
दु'आ
है
जो
सदा
साया-फ़गन
रहती
है
Sarfraz Nawaz
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तमाम
हैं
बिमारियाँ
मगर
तुम्हें
हुआ
है
इश्क़
तो
अब
तुम्हें
ज़रूरत-ए-दुआ
ही
है
दवा
नहीं
Hasan Raqim
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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प्यास
बुझती
नहीं
होंठ
सूखे
पड़े
हाल
क्या
हो
गया
ग़म
के
बाज़ार
में
रात
कटती
है
बिस्तर
पे
करवट
में
अब
चैन
लूटा
है
तू
ने
सनम
प्यार
में
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Zafar Siddqui
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कॉल
पर
कॉल
हमदम
करे
है
राह
दुश्वार
मौसम
करे
है
बीच
मझधार
में
फँस
गया
हूँ
आँख
ये
मसअला
नम
करे
है
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Zafar Siddqui
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यार
की
यार
से
जुदाई
है
हिज्र
की
याद
से
लड़ाई
है
ग़म
से
मेरा
उदास
है
बिस्तर
याद
तेरी
'ज़फर'
जो
आई
है
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Zafar Siddqui
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तुम
यक़ीं
मत
मशीन
पर
रखना
पाँव
अपने
ज़मीन
पर
रखना
वो
ज़फ़र
जाल
में
फँसाएगा
तुम
नज़र
उस
हसीन
पर
रखना
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Zafar Siddqui
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जंग
मैदान-ए-जंग
में
होगी
क़त्ल
भी
अब
किसी
को
होना
है
Zafar Siddqui
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