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Zafar Siddqui
pyaas bujhti nahin hont sukhe pade
pyaas bujhti nahin hont sukhe pade | प्यास बुझती नहीं होंठ सूखे पड़े
- Zafar Siddqui
प्यास
बुझती
नहीं
होंठ
सूखे
पड़े
हाल
क्या
हो
गया
ग़म
के
बाज़ार
में
रात
कटती
है
बिस्तर
पे
करवट
में
अब
चैन
लूटा
है
तू
ने
सनम
प्यार
में
- Zafar Siddqui
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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किस
तरह
मेरी
जान
ये
किरदार
बने
है
जो
तुझ
सेे
मिले
है
वो
तेरा
यार
बने
है
Vikram Gaur Vairagi
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मैं
उसे
वो
मुझको
समझाता
रहा
पर
त'अल्लुक़
फिर
भी
मुरझाता
रहा
Madan Mohan Danish
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बाग़बाँ
हम
तो
इस
ख़याल
के
हैं
देख
लो
फूल
फूल
तोड़ो
मत
Jaun Elia
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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तुम
भी
लिखना
तुम
ने
उस
शब
कितनी
बार
पिया
पानी
तुम
ने
भी
तो
छज्जे
ऊपर
देखा
होगा
पूरा
चाँद
Nida Fazli
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हाथ
में
उसके
अँगूठी
नाक
में
थी
उस
के
नथ
रात
मुझ
को
देख
कर
वो
ख़ूब
शरमाती
रही
Zafar Siddqui
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यार
की
यार
से
जुदाई
है
हिज्र
की
याद
से
लड़ाई
है
ग़म
से
मेरा
उदास
है
बिस्तर
याद
तेरी
'ज़फर'
जो
आई
है
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Zafar Siddqui
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मैने
बचा
रखा
है
ईमान
ज़िन्दगी
में
दूँ
साथ
हक
का
है
ये
अरमान
ज़िन्दगी
में
मैं
चल
पड़ा
मिटाने
नफ़रत
जहाँ
से
सारे
ये
राह
भी
नहीं
है
आसान
ज़िन्दगी
में
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Zafar Siddqui
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देख
ली
उसकी
ये
हुनर
मंदी
उस
ने
दिल
को
बना
लिया
बंदी
ये
समर
ये
शज़र
हवा
ठंडी
ख़ूब-तर
शान
है
ख़ुदावंदी
सोचता
हूँ
निकाह
कर
डालूँ
चाहिए
बस
तेरी
रज़ा
मंदी
झूठ
पर
झूठ
बोलते
रहना
सच
पे
लागू
यहाँ
है
पाबंदी
सर
झुका
कर
ज़फर
वो
चलते
हैं
जिनकी
नज़रों
में
है
हया
मंदी
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Zafar Siddqui
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ज़ुल्म
की
इंतिहा
बुरी
होगी
सोच
कर
बस
ये
मर
गया
कोई
Zafar Siddqui
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