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Neeraj Neer
main shaair usko choodi hi de saka tha bas
main shaair usko choodi hi de saka tha bas | मैं शाइर उसको चूड़ी ही दे सकता था बस
- Neeraj Neer
मैं
शाइर
उसको
चूड़ी
ही
दे
सकता
था
बस
रिश्ता
सोने
के
कंगन
देने
पर
होता
है
- Neeraj Neer
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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मैं
अपने
बाप
के
सीने
से
फूल
चुनता
हूँ
सो
जब
भी
साँस
थमी
बाग़
में
टहल
आया
Hammad Niyazi
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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ये
मोहब्बत
का
फ़साना
भी
बदल
जाएगा
वक़्त
के
साथ
ज़माना
भी
बदल
जाएगा
Waseem Barelvi
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सुन
लिया
कैसे
ख़ुदा
जाने
ज़माने
भर
ने
वो
फ़साना
जो
कभी
हमने
सुनाया
भी
नहीं
Qateel Shifai
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बड़ा
घाटे
का
सौदा
है
'सदा'
ये
साँस
लेना
भी
बढ़े
है
उम्र
ज्यूँँ-ज्यूँँ
ज़िंदगी
कम
होती
जाती
है
Sada Ambalvi
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घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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आँख
वो
इक
शहर
जिस
में
दम
घुटेगा
दिल
में
रहना
घर
में
रहने
की
तरह
है
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Neeraj Neer
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ख़रीदो
कौड़ियों
के
भाव
में
मुझको
मैं
सस्ता
हो
गया
हूँ
उस
के
जाने
से
Neeraj Neer
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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ये
करिश्मा
हुआ
चूमने
से
उसे
तीरगी
पर
खुली
रोशनी
की
समझ
Neeraj Neer
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क्या
हुआ
कम
है
गर
ज़िंदगी
की
समझ
सबको
होती
नहीं
शा'इरी
की
समझ
काश
सीने
से
लगकर
के
कहती
मैं
हूँ
मान
लेता
कि
है
ख़ामुशी
की
समझ
तुमने
तो
हाल
भी
मेरा
पूछा
नहीं
उसपे
दावा
तिरा
दोस्ती
की
समझ
वक़्त
अपना
बुरा
चल
रहा
इसलिए
सब
सेे
अच्छी
है
मेरी
घडी
की
समझ
हिज्र
में
वस्ल
की
बात
मत
कर
समझ
राख
में
क़ैद
है
तिशनगी
की
समझ
मैं
कमरबंद
पे
शे'र
कैसे
कहूँ
खा
रही
इश्क़
को
करधनी
की
समझ
इल्म
तो
बाद
में
काम
आया
मिरे
उसको
खोकर
हुई
शा'इरी
की
समझ
एक
लड़की
जो
सोलह
में
ब्याही
गई
पास
उसके
थी
बस
ओढ़नी
की
समझ
-नीरज
नीर
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Neeraj Neer
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