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Zafar Siddqui
yuñ koi be vafaa nahin hota
yuñ koi be vafaa nahin hota | यूँँ कोई बे वफ़ा नहीं होता
- Zafar Siddqui
यूँँ
कोई
बे
वफ़ा
नहीं
होता
बे
सबब
ही
जुदा
नहीं
होता
आ
गए
लोग
कुछ
मदद
करने
हर
कोई
तो
बुरा
नहीं
होता
किस
घड़ी
किस
को
मौत
आ
जाए
ये
किसी
को
पता
नहीं
होता
जंग
दुश्मन
से
जीत
ली
मैंने
हौसला
हो
तो
क्या
नहीं
होता
ऐसे
रस्ते
पे
चल
पड़ा
हूँ
मैं
ख़त्म
ही
रास्ता
नहीं
होता
- Zafar Siddqui
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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ठहाका
मार
कर
हथियार
हँसते
नहीं
जीतेंगे
अब
इंसान
हम
सेे
Umesh Maurya
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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रो
रहा
है
बशर
मगर
देखो
ज़िन्दगी
को
रफ़ू
नहीं
करता
Tarun Pandey
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इश्क़
जब
तक
न
कर
चुके
रुस्वा
आदमी
काम
का
नहीं
होता
Jigar Moradabadi
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कान्हा
होंगे
लोग
वहाँ
के
राधा
होंगी
बालाएँ
प्यार
की
बंसी
बजती
होगी
हर
समय
हर
ठाओं
रे
Ghaus Siwani
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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कॉल
पर
कॉल
हमदम
करे
है
राह
दुश्वार
मौसम
करे
है
बीच
मझधार
में
फँस
गया
हूँ
आँख
ये
मसअला
नम
करे
है
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Zafar Siddqui
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प्यास
बुझती
नहीं
होंठ
सूखे
पड़े
हाल
क्या
हो
गया
ग़म
के
बाज़ार
में
रात
कटती
है
बिस्तर
पे
करवट
में
अब
चैन
लूटा
है
तू
ने
सनम
प्यार
में
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Zafar Siddqui
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हर
तरफ़
ज़ुल्म
की
ही
ख़बर
है
ख़ौफ़
में
जी
रहा
हर
बशर
है
सख़्त
होना
पड़ेगा
हमें
भी
वरना
जीने
की
मुश्किल
डगर
है
हम
भी
क़ाइल
हैं
उन
की
हया
के
उन
की
रहती
जो
नीची
नज़र
है
फ़िक्र
उस
की
करूँगा
हमेशा
उन्सियत
उस
को
मुझ
सेे
अगर
है
इश्क़
कर
के
ज़रा
मुझ
सेे
देखो
जाँ
लुटा
दूँ
ये
क़ौले
ज़फर
है
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Zafar Siddqui
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बात
अब
तीर
की
तरह
होगी
शा'इरी
मीर
की
तरह
होगी
है
फ़साना
ज़फ़र
का
राँझा
सा
दास्ताँ
हीर
की
तरह
होगी
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Zafar Siddqui
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ज़ुल्म
की
इंतिहा
बुरी
होगी
सोच
कर
बस
ये
मर
गया
कोई
Zafar Siddqui
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