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Zafar Siddqui
ye tumhein kya hua hai kya gham hai
ye tumhein kya hua hai kya gham hai | ये तुम्हें क्या हुआ है क्या ग़म है
- Zafar Siddqui
ये
तुम्हें
क्या
हुआ
है
क्या
ग़म
है
तुम
बताओ
तो
आँख
क्यूँ
नम
है
एक
ही
घूँट
में
शिफ़ा
होगी
पीके
देखो
ये
आब-ए-ज़मज़म
है
- Zafar Siddqui
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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है
राम
के
वजूद
पे
हिन्दोस्ताँ
को
नाज़
अहल-ए-नज़र
समझते
हैं
उस
को
इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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बात
अब
तीर
की
तरह
होगी
शा'इरी
मीर
की
तरह
होगी
है
फ़साना
ज़फ़र
का
राँझा
सा
दास्ताँ
हीर
की
तरह
होगी
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Zafar Siddqui
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कॉल
पर
कॉल
हमदम
करे
है
राह
दुश्वार
मौसम
करे
है
बीच
मझधार
में
फँस
गया
हूँ
आँख
ये
मसअला
नम
करे
है
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Zafar Siddqui
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हाथ
में
उसके
अँगूठी
नाक
में
थी
उस
के
नथ
रात
मुझ
को
देख
कर
वो
ख़ूब
शरमाती
रही
Zafar Siddqui
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हुस्न
की
मत
नुमाइश
किया
कीजिए
यूँँ
न
बे-पर्दा
छत
पर
दिखा
कीजिए
Zafar Siddqui
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दाग़
समझे
है
ज़माना
चाँद
हूँ
माँ
के
लिए
मैं
Zafar Siddqui
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