Iftikhar Bukhari

Iftikhar Bukhari

@iftikhar-bukhari

Iftikhar Bukhari shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Iftikhar Bukhari's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

1

Content

11

Likes

0

Shayari
Audios
  • Nazm
बारिशगिरतीहै
मटियालीक़ब्रोंपरबारिशगिरतीहै
हद्द-ए-नज़रतकजल-थल
सीलासीलाख़्वाबमुसलसल
यादनहींमैंनेबारिशकोपहलीबारकहाँदेखाथा
खिड़कीमेंयाख़्वाबमें
छतपरयादरियाकेकिनारे
अफ़्रीक़ाकेबच्चोंकीबंजरआँखोंमें
याबंगालमेंनंगीलाशोंवालेसोगीसाहिलोंपर
कितनीबारिशेंदफ़्नहैंजानेइसबारिशकेनीचे
एकगलीकेठंडेपानीमेंभूलाबचपनचलताथा
एकमहकताआँचलकोईगीलाचेहरापोंछरहाथा
जानेकहाँमैंफेंकआयाहूँ
वोदिलऔरवोजूते
तैरतीतख़्तियाँभीगेबस्ते
प्यासीकूककिसीकोयलकी
दूरहरीतन्हाईमें
इकगीतजोउसकेलबनेमेरेलबसेजुड़करगायाथा
इकजलतीबुझतीशामजुदाई
सावनकीपहलीबूंदोंमें
जिसनेइतनेरंगभरेथे
मेरीउम्रकेख़ाली-पनमें
आजख़ुदउसकाअपनाकोईरंगनहीं
मटियालीक़ब्रोंपरबारिशगिरतीहै
बे-मक़्सदहैजैसेज़िंदगी
बे-मा'नीहैजैसेमौत
Read Full
Iftikhar Bukhari
Share
0 Likes
तुमतोकहतेथे
दुनियाबदलनेकोहै
छोटेछोटेथेहम
फ़लसफ़ीकहकेसबछेड़तेथेतुम्हें
फुलाँनेकहाहै
फुलाँनेलिखाहै
किताबोंसेदेतेथेअक्सरहवाले
सवेरेसवेरे
मुझेरोज़लेजातेथे
साथइस्टालपर
मुफ़्तअख़बारपढ़ने
येधुनथी
किबसहोहो
आजदुनियाबदलनेकीअच्छीख़बर
छपगईहो
ज़मानेकीआँधीमेंउड़तेहुए
टुकड़ेअख़बारके
हमजुदाहोगए
फिरमिलेहीनहीं
इफ़्तिख़ार
अबमिरेशीशा-ए-उम्रमें
आख़िरीरेतहै
चंदआइंदाअख़बारबाक़ीहैंशायद
तिरेनक़्शधुँदलाचुकेहैं
मिरीयादमें
परतिरानाममैंभूलसकतानहीं
मेरेबचपनकेदोस्त
हमदोनोंहमनामथेना
नहींजानता
तुमकहाँहो
याशायदनहींहोअभीतक
मिरीतरहदुनियामें
दुनियाजोबदलीनहीं
हाँ
जोइस्टालथाना
वोअख़बारका
रेलवेरोडपर
उसजगहएकजूतोंकीदुकानहै
उसज़मानेकेहॉकरसभीमरचुकेहैं
Read Full
Iftikhar Bukhari
Share
0 Likes
शायदएकसाथसीखताहैआदमी
चलनाऔरसोचना
एकसहनमें
एकदिन
मैंसीखगया
चलना
औरसोचना
चिड़ियों
पौदों
औररंगबिरंगेकीड़ोंकेदरमियान
माँकहती
तुमइतनाचलतेहो
एकसीधमेंचलो
तोशामतकपहुँचजाओ
किसीऔरशहरमें
मैंनेआवारगीकी
दोपहरोंमें
अकेले
तारोंभरीरातोंमें
उदासशाइ'रों
औरजुगनुओंकेसाथ
मैंचलतारहा
गलियोंमें
शाह-राहोंपर
जुलूसोंमें
जनाज़ोंकेसाथ
सोचतेहुए
ना-इंसाफ़ीइंक़िलाब
मौतख़ुदाऔरजहन्नुम
औरबहुतसीफ़ुज़ूलियात
मैंचलतारहा
बारिशोंमें
बर्फ़-बारियोंमें
धुंदमें
धूपऔरआँधियोंमें
सोचतेहुए
जोमैंबतासकताहूँफ़ख़्रसे
औरवोभी
जोमैंख़ुदसेभीछुपाताहूँ
मैंअजनबीमुल्कोंमेंगया
तन्हाचलनेकेलिए
तन्हासोचनेकेलिए
अबमैंलौटआयाहूँ
ढलतीउम्रमें
बग़ैरकहींपहुँचेहुए
अबमैंकहींनहींजाता
परअबभीचलताहूँ
हररोज़
कम-अज़-कम
एकघंटा
तेज़तेज़
पावँचक्कीपर
येसोचतेहुए
किमैंकबतकचलूँगा
मैंकबतकसोचूँगा
Read Full
Iftikhar Bukhari
Share
0 Likes
दिनलड़खड़ाताहै
दुनियाअपनेसुकूतमेंडगमगातीहै
हरशयक़ाबिल-ए-दीद
मगरगुरेज़ाँहै
सबकुछनज़दीकहै
मगरना-मुम्किन
किताबआईनाकपड़े
पिंजराऔरपरिंदा
अपनेनामोंकेसाएमें
बे-हरकत
वक़्तधड़कताहै
मेरेसीनेमें
लहूकीबदलनेवाली
आज़ुर्दातालपर
धूप-छाँवसेबे-नियाज़दीवार
मब्नी-बर-वहमतस्वीरोंकेतिमसालघर
मेंबदलजातीहै
मैंख़ुदकोअपनीज़ातपरपहरादेती
आँखकेमरकज़मेंछुपाताहूँ
मैंसिमटताहूँ
मैंबिखरताहूँ
मैंफ़क़तएकवक़्फ़ाहूँ
रुकनेऔरचलनेकेदरमियान
जीनेऔरमरनेकेदरमियान
मैंएकआहटहूँ
ना-क़ाबिल-ए-शुनीद
महीनपलकेलिए
रातब-ज़ाहिरबे-कनारहै
फिरभीमैंसरकोउठाताहूँ
आसमानपरसितारोंकीमख़्फ़ीतहरीर
अचानकमुझपरमुस्कुरातीहै
औरअनजानेमें
मैंजानजाताहूँ
किमुझेलिखागया
मिटनेकेलिए
Read Full
Iftikhar Bukhari
Share
0 Likes
कितनेसमुंदर
कितनेसहरा
जंगलऔरबारिशें
बे-शुमारआईनोंकाख़ाली-पन
लम्हेयासदियाँ
उबूरकरके
दाख़िलहुई
मेरीतन्हाई
तेरीतन्हाईमें
शहर-ए-गुल-ए-सुर्ख़
अज़ीमख़ूब-सूरतपत्थर
मुझेख़ज़ानेसे
कोईसरोकारनहीं
जहाँखूंटेसेबँधा
लालघोड़ा
तेईससौबरस
कीबे-ख़्वाबीमें
ईस्तादाहै
मुझेफ़क़ततेरीउदासरातका
एककोनादरकारहै
किमेरीख़ामोशी
तेरीख़ामोशीसेकलामकरे
मेरेपासअफ़्सोसकीकहानीहै
जिसेसुनकरक़दीमचाँद
रेतकेआँसूबहाएगा
कितेरेमातमीगुलाबसैराबहों
उड़तेज़मानोंकीधज्जियाँ
गुम-शुदा'उम्रोंकीराइगानी
तारीख़कीमुनाफ़िक़अलमारियोंमें
लटकतेउस्तुख़्वाँ
मुझेअमानतदारपाएँगे
बर्बाददीवारोंकीख़राशोंसे
झाँकताइंहिमाकनहींटूटेगा
गुलाबशहर
मैंबे-ज़बानक़िस्सा-गो
एकशब-बसरीकासवालीहूँ
तेरेसंगीनदरवाज़ेपर
मैंतुझेतेरेजैसा
अपनादिलहदियाकरूँँगा
पत्थरकागुलाब
तुझेख़ामोशदास्तानसुनाऊँगा
किसीबहुतक़दीमज़मानेकी
गुनाहगारख़ुदाओंसेदूर
ख़ालिसइबादतगुज़ारअँधेरेमें
सुब्ह-ए-अबदकेआख़िरीक़हक़हेसेबे-नियाज़
Read Full
Iftikhar Bukhari
Share
0 Likes
मैंसोचताहूँ
अगरदोरास्तेहोते
तुमतकजानेकेलिए
किसीबाग़मेंचहल-क़दमीकीतरह
यख़-बस्तापहाड़ोंमें
सफ़ेदसुरंगोंजैसे
अगरदोख़्वाबहोते
सहमीहुईख़ामोशरातोंमें
जागनेकेलिए
सोनेकेलिए
अगरदोजंगलहोते
पुर-असरारभटकनेकेलिए
यादुनिया-दारोंसेकटनेकेलिए
अगरदोपरिंदेहोते
मोहब्बतकेलिए
अगरदोसराबहोते
प्यासाजीनेकेलिए
प्यासामरनेकेलिए
अगरदोकहानियाँहोतीं
क़दीमचट्टानपरकंदा
ना-क़ाबिल-ए-फ़हमनुक़ूशमेंमदफ़ून
यादकरनेकेलिए
भूलजानेकेलिए
अगरदोगीतहोते
मेरेजीतेजी
आख़िरीहिचकीलेनेकेलिए
यामेरेबा'दकुछपल
मुझेरोनेकेलिए
अगरदोसितारेहोते
सुब्ह-ए-काज़िबकीदहलीज़पर
चमकनेकेलिए
बुझनेकेलिए
उम्रगुज़ारकर
मैंसोचताहूँ
येमुमकिननहीं
इसदुनियाकीबे-इंतिहाईमें
दोचीज़ेंनहींहोतीं
सिवाएदोतन्हाइयोंके
तू
औरमैं
Read Full
Iftikhar Bukhari
Share
0 Likes