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Iftikhar Bukhari
shaayad ek saath seekhta hai aadmi
shaayad ek saath seekhta hai aadmi | शायद एक साथ सीखता है आदमी
- Iftikhar Bukhari
शायद
एक
साथ
सीखता
है
आदमी
चलना
और
सोचना
एक
सहन
में
एक
दिन
मैं
सीख
गया
चलना
और
सोचना
चिड़ियों
पौदों
और
रंग
बिरंगे
कीड़ों
के
दरमियान
माँ
कहती
तुम
इतना
चलते
हो
एक
सीध
में
चलो
तो
शाम
तक
पहुँच
जाओ
किसी
और
शहर
में
मैं
ने
आवारगी
की
दोपहरों
में
अकेले
तारों
भरी
रातों
में
उदास
शाइ'रों
और
जुगनुओं
के
साथ
मैं
चलता
रहा
गलियों
में
शाह-राहों
पर
जुलूसों
में
जनाज़ों
के
साथ
सोचते
हुए
ना-इंसाफ़ी
इंक़िलाब
मौत
ख़ुदा
और
जहन्नुम
और
बहुत
सी
फ़ुज़ूलियात
मैं
चलता
रहा
बारिशों
में
बर्फ़-बारियों
में
धुंद
में
धूप
और
आँधियों
में
सोचते
हुए
जो
मैं
बता
सकता
हूँ
फ़ख़्र
से
और
वो
भी
जो
मैं
ख़ुद
से
भी
छुपाता
हूँ
मैं
अजनबी
मुल्कों
में
गया
तन्हा
चलने
के
लिए
तन्हा
सोचने
के
लिए
अब
मैं
लौट
आया
हूँ
ढलती
उम्र
में
बग़ैर
कहीं
पहुँचे
हुए
अब
मैं
कहीं
नहीं
जाता
पर
अब
भी
चलता
हूँ
हर
रोज़
कम-अज़-कम
एक
घंटा
तेज़
तेज़
पावँ
चक्की
पर
ये
सोचते
हुए
कि
मैं
कब
तक
चलूँगा
मैं
कब
तक
सोचूँगा
- Iftikhar Bukhari
रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र
का
भी
इल्म
है
लाज़िम
फ़क़त
दिल
टूट
जाने
से
कोई
शाइर
नहीं
बनता
Avtar Singh Jasser
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हमने
सब
सीखा
था
उसके
ख़ातिर
बस
भूल
उसे
ख़ुद
जीना
सीख
नहीं
पाए
Surya Tiwari
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बारूद
के
बदले
हाथों
में
आ
जाए
किताब
तो
अच्छा
हो
ऐ
काश
हमारी
आँखों
का
इक्कीसवाँ
ख़्वाब
तो
अच्छा
हो
Ghulam Mohammad Qasir
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किताबें
खोल
कर
बैठे
हैं
लेकिन
रिवीजन
बस
तुम्हारा
हो
रहा
है
Prateek Shukla
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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आदमिय्यत
और
शय
है
इल्म
है
कुछ
और
शय
कितना
तोते
को
पढ़ाया
पर
वो
हैवाँ
ही
रहा
Sheikh Ibrahim Zauq
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रक़ीब
आकर
बताते
हैं
यहाँ
तिल
है
वहाँ
तिल
है
हमें
ये
जानकारी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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