chalti rahtii hai | चलती रहती है

  - Iftikhar Bukhari
चलतीरहतीहै
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आगेपीछे
साथसाथ
धीरेधीरे
यातेज़क़दमोंसे
जैसेख़िरामकरतीहैहवा
बे-पनाहरातोंमें
काँटोंऔरझाड़ियोंमें
बे-ख़बरीकेनक़्शोंमें
चलतीरहतीहै
कोईबे-मा'नीगुफ़्तुगू
उम्रगुज़ारनेकेलिए
दूरियोंकेदरमियान
हिज्र-ओ-विसालकेकोहरेमें
यख़-बस्ताख़ामोशरस्तोंमें
चलतीरहतीहै
कुछदेरतक
कोईना-क़ाबिल-ए-फ़हमचाल
अपनेख़िलाफ़
आज़ुर्दावुसअ'तोंकीबिसातपर
अज़लऔरअबदकीबे-मा'नीहमेश्गीमें
जीनेकीजुस्तुजूमें
मरनेकीआरज़ूमें
  - Iftikhar Bukhari
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