main sochta hooñ | मैं सोचता हूँ

  - Iftikhar Bukhari
मैंसोचताहूँ
अगरदोरास्तेहोते
तुमतकजानेकेलिए
किसीबाग़मेंचहल-क़दमीकीतरह
यख़-बस्तापहाड़ोंमें
सफ़ेदसुरंगोंजैसे
अगरदोख़्वाबहोते
सहमीहुईख़ामोशरातोंमें
जागनेकेलिए
सोनेकेलिए
अगरदोजंगलहोते
पुर-असरारभटकनेकेलिए
यादुनिया-दारोंसेकटनेकेलिए
अगरदोपरिंदेहोते
मोहब्बतकेलिए
अगरदोसराबहोते
प्यासाजीनेकेलिए
प्यासामरनेकेलिए
अगरदोकहानियाँहोतीं
क़दीमचट्टानपरकंदा
ना-क़ाबिल-ए-फ़हमनुक़ूशमेंमदफ़ून
यादकरनेकेलिए
भूलजानेकेलिए
अगरदोगीतहोते
मेरेजीतेजी
आख़िरीहिचकीलेनेकेलिए
यामेरेबा'दकुछपल
मुझेरोनेकेलिए
अगरदोसितारेहोते
सुब्ह-ए-काज़िबकीदहलीज़पर
चमकनेकेलिए
बुझनेकेलिए
उम्रगुज़ारकर
मैंसोचताहूँ
येमुमकिननहीं
इसदुनियाकीबे-इंतिहाईमें
दोचीज़ेंनहींहोतीं
सिवाएदोतन्हाइयोंके
तू
औरमैं
  - Iftikhar Bukhari
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