सतारहीहैबहुतमछलियोंकीबासमुझे
बुलारहाहैसमुंदरफिरअपनेपासमुझे
हवसकाशीशा-ए-नाज़ुकहूँफूटजाऊँगा
नमारखींचकेइसतरहसंग-ए-यासमुझे
मैंक़ैदमेंकभीदीवार-ओ-दरकीरहनसका
नआसकाकभीशहरोंकारंगरासमुझे
मैंतेरेजिस्मकेदरियाकोपीचुकाहूँबहुत
सतारहीहैफिरअबक्यूँँबदनकीप्यासमुझे
मिरेबदनमेंछुपाहैसमुंदरोंकाफ़ुसूँ
जलासकेगीभलाक्यायेख़ुश्कघासमुझे
गिरेगाटूटकेसरपरयेआसमानकभी
डराएरखताहैहरदममिराक़यासमुझे
झुलसरहाहूँमैंसदियोंसेग़मकेसहरामें
मगरहैअब्र-ए-गुरेज़ाँकीफिरभीआसमुझे