sata rahi hai bahut machliyon ki baas mujhe | सता रही है बहुत मछलियों की बास मुझे

  - Ehtisham Akhtar
सतारहीहैबहुतमछलियोंकीबासमुझे
बुलारहाहैसमुंदरफिरअपनेपासमुझे
हवसकाशीशा-ए-नाज़ुकहूँफूटजाऊँगा
मारखींचकेइसतरहसंग-ए-यासमुझे
मैंक़ैदमेंकभीदीवार-ओ-दरकीरहसका
सकाकभीशहरोंकारंगरासमुझे
मैंतेरेजिस्मकेदरियाकोपीचुकाहूँबहुत
सतारहीहैफिरअबक्यूँँबदनकीप्यासमुझे
मिरेबदनमेंछुपाहैसमुंदरोंकाफ़ुसूँ
जलासकेगीभलाक्यायेख़ुश्कघासमुझे
गिरेगाटूटकेसरपरयेआसमानकभी
डराएरखताहैहरदममिराक़यासमुझे
झुलसरहाहूँमैंसदियोंसेग़मकेसहरामें
मगरहैअब्र-ए-गुरेज़ाँकीफिरभीआसमुझे
  - Ehtisham Akhtar
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