KHvaab aankhoñ men nihaan hai ab bhi | ख़्वाब आँखों में निहाँ है अब भी

  - Ehtisham Akhtar
ख़्वाबआँखोंमेंनिहाँहैअबभी
बुझगईआगधुआँहैअबभी
वोमिरेपासनहींहैलेकिन
उसकेहोनेकागुमाँहैअबभी
क्याबहादुरकोईआयाहीनहीं
राहमेंसंग-ए-गिराँहैअबभी
कोईप्यासाहीनहींहैवर्ना
चश्मा-ए-शौक़रवाँहैअबभी
घरकोकाँधेपेलिएफिरताहूँ
मुझमेंयेताब-ओ-तवाँहैअबभी
मैंत'अल्लुक़सेपरेहूँलेकिन
मुझसेवाबस्ताजहाँहैअबभी
  - Ehtisham Akhtar
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