hazaaron saal se main jis ke intizaar men tha | हज़ारों साल से मैं जिस के इंतिज़ार में था

  - Ehtisham Akhtar
हज़ारोंसालसेमैंजिसकेइंतिज़ारमेंथा
वोअक्स-ए-ख़्वाबतोमेरेहीइख़्तियारमेंथा
वोमेरीज़ातकेपरतवसेमाहताबहुआ
वगर्नाकुर्रा-ए-बे-नूरकिसशुमारमेंथा
कोईलगाओथाअबहरेशजरसेमुझे
मैंबर्ग-ए-ख़ुश्कथाउड़तेहुएग़ुबारमेंथा
सफ़रमेंयूँँहीझुलसतारहाख़बरहुई
किठंडेपानीकाचश्माभीरहगुज़ारमेंथा
मैंबद-गुमाँकभीउससेहोसका'अख़्तर'
अजबतरहकामज़ाउसकेझूटेप्यारमेंथा
  - Ehtisham Akhtar
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