mirii hayaat ko be-rabt baab rahne de | मिरी हयात को बे-रब्त बाब रहने दे

  - Ehtisham Akhtar
मिरीहयातकोबे-रब्तबाबरहनेदे
वरक़वरक़यूँँहीग़मकीकिताबरहनेदे
मैंराहगीरोंकीहिम्मतबँधानेवालाहूँ
मिरेवजूदमेंशामिलशराबरहनेदे
तबाहख़ुदकोमैंकरलूँबदनकोछूकेतिरे
तूअपनेलम्सकामुझपरअज़ाबरहनेदे
ज़राठहरकिअभीख़ूनमेंसमाईनहीं
मिरेक़रीबबदनकीशराबरहनेदे
भुलाचुकाहूँमैंसबकुछदिलायादमुझे
जोखोचुकाहूँअबउसकाहिसाबरहनेदे
जलालियाहैबदनअपनीआगमेंमैंने
बुझाइसकोअभीयेअज़ाबरहनेदे
  - Ehtisham Akhtar
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