buland baang da'won ki | बुलंद बाँग दा'वों की

  - Ehtisham Akhtar
बुलंदबाँगदा'वोंकी
आवाज़ें
खोटेसिक्कोंकीतरह
बजतीहैं
फिरभीछोटेक़दकेलोग
इनक़द-आवरआवाज़ोंको
सुनतेरहतेहैं
काग़ज़केटुकड़ोंकी
अबकोईक़ीमतरही
फिरभीभूकीआँखें
उन्हेंढूँढतीहैं
औरनाकामरहतीहैं
औरबे-रहमहाथ
उन्हेंजम्अ''करतेरहतेहैं
छोटेक़दकेलोग
अपनीआवाज़खोचुकेहैं
वोसिर्फ़देखसकतेहैं
औरसुनसकतेहैं
  - Ehtisham Akhtar
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