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shampa andaliib
saath saaya tak nahin hai
saath saaya tak nahin hai | साथ साया तक नहीं है
- shampa andaliib
साथ
साया
तक
नहीं
है
हम
अकेले
रो
रहे
हैं
- shampa andaliib
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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उसके
गालो
की
ख़ला
से
मेरा
बोसा
बिगड़ा
है
दूर
रक्खें
शोख़
बच्चो
को
सभी
दीवार
से
Raj
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पहले
तो
वो
हाथ
पकड़कर
कमरे
से
बाहर
लाया
और
फिर
मुझको
इस
दुनिया
में
यार
अकेला
छोड़
गया
Tanoj Dadhich
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लब
पे
आता
था
जो
दु'आ
बन
कर
दिल
में
रहता
है
अब
ख़ला
बन
कर
कितना
इतरा
रहा
है
अब
वो
फूल
तेरे
बालों
का
मोगरा
बन
कर
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Haider Khan
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मैं
अपने
चारों
तरफ़
हूँ
और
इस
तरह
का
हुजूम
अजीब
किस्म
की
तन्हाई
साथ
लाता
है
Abhishek shukla
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हम
दोनों
मिल
कर
भी
दिलों
की
तन्हाई
में
भटकेंगे
पागल
कुछ
तो
सोच
ये
तूने
कैसी
शक्ल
बनाई
है
Jaun Elia
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तुम
मिरे
साथ
हो
ये
सच
तो
नहीं
है
लेकिन
मैं
अगर
झूट
न
बोलूँ
तो
अकेला
हो
जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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ज़रा
देर
बैठे
थे
तन्हाई
में
तिरी
याद
आँखें
दुखाने
लगी
Adil Mansuri
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दर्द
आज़ाद
हो
गया
मेरा
आज
दिल
शाद
हो
गया
मेरा
shampa andaliib
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साँसें
दो
चार
रह
गईं
लेकिन
ख़त
तुम्हारा
अभी
नहीं
आया
shampa andaliib
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अपनी
आँखों
पे
बाँध
कर
पट्टी
तेरी
गलियों
में
रक़्स
करती
हूँ
shampa andaliib
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कशिश
है
आपके
चेहरे
में
ऐसी
फ़लक
से
चाँद
तारे
आ
गए
हैं
shampa andaliib
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जहाँ
भी
ज़रा
सी
मिले
रौशनी
दिल
ख़मोशी
उदासी
मिटा
तीरगी
दिल
पुराने
दरीचे
सभी
खोल
बैठा
न
बन
जाए
मुश्किल
तुझे
ताज़गी
दिल
कई
लोग
अपने
पराए
हुए
हैं
हमें
आज़माए
है
फिर
ज़िंदगी
दिल
ये
गर्दिश
का
आलम
है
दो
चार
दिन
बस
नहीं
रहता
कोई
हमेशा
दुखी
दिल
मुझे
मुश्किलों
ने
बहुत
आज़माया
खड़ी
अपने
दम
पर
मैं
फिर
भी
रही
दिल
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shampa andaliib
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