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shampa andaliib
jahaan bhi zara si mile raushni dil
jahaan bhi zara si mile raushni dil | जहाँ भी ज़रा सी मिले रौशनी दिल
- shampa andaliib
जहाँ
भी
ज़रा
सी
मिले
रौशनी
दिल
ख़मोशी
उदासी
मिटा
तीरगी
दिल
पुराने
दरीचे
सभी
खोल
बैठा
न
बन
जाए
मुश्किल
तुझे
ताज़गी
दिल
कई
लोग
अपने
पराए
हुए
हैं
हमें
आज़माए
है
फिर
ज़िंदगी
दिल
ये
गर्दिश
का
आलम
है
दो
चार
दिन
बस
नहीं
रहता
कोई
हमेशा
दुखी
दिल
मुझे
मुश्किलों
ने
बहुत
आज़माया
खड़ी
अपने
दम
पर
मैं
फिर
भी
रही
दिल
- shampa andaliib
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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वो
लोग
हम
ही
थे
मुहब्बत
में
जो
फिर
आगे
हुए
वो
लोग
हम
ही
थे
मियाँ
जो
दूर
भागे
जिस्म
से
Kartik tripathi
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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अपने
वादे
की
आबरू
रक्खी
तुझपे
फिर
से
तरस
नहीं
खाया
shampa andaliib
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मुसलसल
तक
रही
तस्वीर
उनकी
जिन्हें
देखा
नहीं
जी
भर
के
मैंने
shampa andaliib
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और
उम्मीद
क्या
रखूँ
तुझ
से
एक
रिश्ता
निभा
नहीं
पाया
shampa andaliib
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और
मंज़र
हसीन
करते
हो
तुम
तो
बिल्कुल
चराग़
जैसे
हो
क्या
तुम्हें
ये
ख़बर
नहीं
है
कि
तुम
मेरे
दिल
के
क़रीब
रहते
हो
मैं
ने
बोला
था
अब
नहीं
रहना
और
तुम
फिर
उदास
बैठे
हो
मुझ
को
साहिल
पे
छोड़ने
वालों
ये
जो
दरिया
है
पार
कैसे
हो
अजनबी
शहर
है
यहाँ
हम
से
कौन
पूछेगा
आप
कैसे
हो
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shampa andaliib
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मुझे
उड़ने
का
मोक़ा
तब
मिला
था
मेरे
सय्याद
ने
जब
पर
जलाए
shampa andaliib
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