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shampa andaliib
musalsal tak rahi tasveer unki
musalsal tak rahi tasveer unki | मुसलसल तक रही तस्वीर उनकी
- shampa andaliib
मुसलसल
तक
रही
तस्वीर
उनकी
जिन्हें
देखा
नहीं
जी
भर
के
मैंने
- shampa andaliib
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मैं
ने
तो
यूँँही
राख
में
फेरी
थीं
उँगलियाँ
देखा
जो
ग़ौर
से
तिरी
तस्वीर
बन
गई
Saleem Betab
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उलझ
जाती
हूँ
अक्सर
आईने
से
मैं
तक़ाबुल
में
जो
ख़ुद
को
देखती
हूँ
अक्स
तेरा
ही
उभरता
है
Kiran K
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मिरा
ही
अक्स
मुझ
पर
हँस
रहा
है
मुझे
इस
आइने
को
तोड़ना
है
Avinash Chaudhary
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अपने
टूटे
फूटे
ख़्वाबों
की
ता'बीर
बनाता
हूँ
मैं
बिखरे
लफ्ज़ों
से
काग़ज़
पर
तस्वीर
बनाता
हूँ
Aves Sayyad
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सिर्फ़
तस्वीर
रह
गई
बाक़ी
जिस
में
हम
एक
साथ
बैठे
हैं
Bilal Ameer Ahmad
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बहुत
मज़ाक़
उड़ाते
हो
तुम
ग़रीबों
का
मदद
तो
करते
हो
तस्वीर
खींच
लेते
हो
Nawaz Deobandi
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जिस
शख़्स
से
शदीद
मोहब्बत
हो
तुमको
वो
तस्वीर
में
दिखाया
गया
हो
किसी
के
साथ
Mueed Mirza
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दिल्ली
के
न
थे
कूचे
औराक़-ए-मुसव्वर
थे
जो
शक्ल
नज़र
आई
तस्वीर
नज़र
आई
Meer Taqi Meer
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दिल-ए-सोज़ाँ
को
भी
महका
रहे
हैं
हमें
जो
ख़्वाब
तेरे
आ
रहे
हैं
तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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देर
तक
आँख
मुसीबत
में
पड़ी
रहती
है
तुम
चले
जाते
हो,
तस्वीर
बनी
रहती
है
Fauziya Rabab
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अपनी
आँखों
में
देखने
दे
मुझे
मेरी
आँखों
को
चैन
पड़
जाए
shampa andaliib
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ज़िंदा
रखती
है
जिस
की
परछाई
एक
ऐसा
दरख़्त
है
माई
कैसे
उस
घर
में
ख़ुश
रहे
माई
भाई
से
लड़
रहा
जहाँ
भाई
बाद
मुद्दत
के
भर
रहे
हैं
ज़ख़्म
उम्र
गुज़री
तो
छट
रही
काई
रहनुमा
हो
गए
कहाँ
ओझल
मेरी
राहों
में
खोद
कर
खाई
तू
नहीं
है
ये
अब
हुआ
एहसास
मैं
अचानक
से
इस
तरफ़
आई
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shampa andaliib
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रोना
भी
चाहा
तो
मुझे
रोने
नहीं
दिया
उस
आँख
ने
सुकून
से
सोने
नहीं
दिया
shampa andaliib
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ख़ुदारा
ना-ख़ुदा
कोई
न
आए
अगर
कश्ती
भँवर
की
सम्त
जाए
ज़माने
से
बहुत
जब
तंग
आए
ख़ुदास
राब्ते
अपने
बढ़ाए
गुज़िश्ता
साल
से
पहले
कभी
भी
मुझे
ये
रतजगे
इतने
न
भाए
बहुत
दिन
बाद
ये
जाना
कि
हम
पर
सितम
कुछ
आपने
भी
कम
न
ढाए
मुझे
तकलीफ़
दे
कर
या-इलाही
किसी
की
आँख
में
आँसू
न
आए
मेरी
आँखों
ने
देखे
ख़्वाब
कैसे
मुझे
क़िस्मत
ने
कैसे
दिन
दिखाए
मुझे
उड़ने
का
मौक़ा'
तब
मिला
था
मेरे
सय्याद
ने
जब
पर
जलाए
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shampa andaliib
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दर-ब-दर
हो
गई
कई
दर
से
तेरा
माथा
ही
चूम
कर
देखूँ
shampa andaliib
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