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Siddharth Saaz
dil-e-sozan ko bhi mahka rahe hain
dil-e-sozan ko bhi mahka rahe hain | दिल-ए-सोज़ाँ को भी महका रहे हैं
- Siddharth Saaz
दिल-ए-सोज़ाँ
को
भी
महका
रहे
हैं
हमें
जो
ख़्वाब
तेरे
आ
रहे
हैं
तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
- Siddharth Saaz
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ये
आरज़ू
भी
बड़ी
चीज़
है
मगर
हमदम
विसाल-ए-यार
फ़क़त
आरज़ू
की
बात
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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यही
तलब
है
जो
जीना
सिखाए
जाती
है
तुम्हारे
ख़्वाब
न
देखें
तो
कब
के
मर
जाएँ
Subhan Asad
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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बहाने
और
भी
होते
जो
ज़िंदगी
के
लिए
हम
एक
बार
तिरी
आरज़ू
भी
खो
देते
Majrooh Sultanpuri
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कि
तुमको
देखने
के
बाद
यारा
तुम्हारे
ख़्वाब
सब
देखा
करेंगे
Kaviraj " Madhukar"
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गुज़र
रहा
हूँ
किसी
ख़्वाब
के
इलाक़े
से
ज़मीं
समेटे
हुए
आसमाँ
उठाए
हुए
Aziz Nabeel
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तेरा
मोहब्बत
से
हार
जाना
मेरी
मोहब्बत
की
हार
भी
है
Siddharth Saaz
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तमाम
दुनिया
में
तीरगी
है
मगर
इक
अंदर
की
रौशनी
है
कभी
तो
लगता
है
ख़त्म
कर
दूँ
प
जब
तू
हँस
के
पुकारती
है
तेरा
मोहब्बत
से
हार
जाना
मेरी
मोहब्बत
की
हार
भी
है
तिरे
बिना
ज़िंदगी
ये
हमको
कि
जैसे
खाने
को
दौड़ती
है
तेरे
दीवाने
का
हारना
भी
तेरे
दीवाने
की
जीत
ही
है
मैं
तेरा
होकर
भी
तन्हा
तन्हा
भटक
रहा
हूँ
ये
बेघरी
है
तू
जिसपे
चढ़
के
उतर
गई
थी
वो
दिल
की
कश्ती
वहीं
खड़ी
है
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Siddharth Saaz
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तू
तो
वाक़िफ़
है
रिवाज़-ए-ग़म
से
इसके
इश्क़
तो
तेरा
भी
ये
पहला
नहीं
है
Siddharth Saaz
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तन्हा
कब
तक
बात
करूँँगा
मैं
तू
भी
मुझ
सेे
बात
किया
कर
दोस्त
Siddharth Saaz
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इक
लड़की
है
जो
इकदम
घर
जैसी
है
वो
बिल्कुल
माँ
जैसी
बातें
करती
है
Siddharth Saaz
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